जवाब- वैज्ञानिकों के मुताबिक, करीब 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थीया के बीच भयानक टक्कर हुई थी, जिसके बाद बचे मलबे से चांद का निर्माण हुआ था।
जवाब- चंद्रयान-3 मिशन पर 615 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह मिशन 40 दिन के सफर के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग के लिए तैयार है। इससे पहले साल 2019 में चंद्रयान-2 मिशन पर 978 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
जवाब- विज्ञान के मुताबिक, चांद की गुरुवाकर्षण शक्ति धरती से बहुत कम है। इसकी वजह से चांद पर जाने से इंसान का वजन कम हो जाता है। बता दें कि इंसान का वजन वास्तिवक वजन से करीब 16.5 फीसदी तक कम हो जाता है।
जवाब- चांद पर आखरी बार जाने वाले इंसान का नाम जीन सर्नन(Gene Cerner) है, जोकि 1972 में नासा के Apollo 17 मिशन के बीच में चांद पर गए थे।
जवाब- चांद का दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र जहां चंद्रयान-3 लैंडिंग की कोशिश कर रहा है, उसे बेहद रहस्यमयी माना जाता है। नासा के मुताबिक, इस क्षेत्र में ऐसे कई गहरे गड्ढे और पर्वत हैं, जिसकी छांव वाली जमीन पर अरबों सालों से सूरज की रोशनी नहीं पहुंची है।
जवाब- चांद दिन के समय बहुत गर्म और रात में बहुत ज्यादा ठंडा होता है। चन्द्रमा में दिन का औसत तापमान 134 डिग्री सेल्सियस और रात का -153 डिग्री सेल्सियस होता है।
जवाब- चांद की सतह से टकराने वाले क्षुद्रग्रह और धूमकेतु की वजह से इसकी सतह पर इतने सारे गड्ढे हैं, क्योंकि चांद पर वायुमंडल नहीं है, इसलिए ये गड्ढे अब तक मौजूद हैं। यही गड्ढे हमें काले धब्बे के रूप में दिखाई देते हैं।
जवाब- 06 फरवरी 1971 को अपोलो-14 ने चांद की सतह को छुआ था। इस मिशन पर गए अंतरिक्षयात्री एलेन शेफर्ड गोल्फर थे और वो इस मिशन पर अपने साथ गोल्फ स्टिक और गोल्फ की गेंदें भी लेकर गए थे। उन्होंने चांद की सतह पर गोल्फ खेला था।
जवाब- हर साल चांद पृथ्वी से लगभग 3.8 सेमी दूर होता जा रहा है। ऐसा अनुमान है कि यह अगर 50 बिलियन वर्षों तक चलता रहा तो चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने में 27.3 दिनों के बजाय 47 दिन लगने लगेंगे।
जवाब- अगर चंद्रमा अचानक गायब हो जाता है, तो उसका गुरुत्व प्रभाव खत्म हो जाता है। इससे हमारी घूमती पृथ्वी पर चंद्रमा का जो प्रभाव पड़ता है। वह भी खत्म हो जाएगा। ऐसे में पृथ्वी का एक दिन केवल 6 से 8 घंटों का होगा। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कम होने से पृथ्वी अभी के मुकाबले तीन से चार गुना ज्यादा तेज घूमेगी।