नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली इसी साल दिसंबर से महाभारत-स्टडीज में एमए प्रोग्राम की शुरुआत करने जा रहा है। इसका उद्देश्य महाभारत को मात्र एक धार्मिक ग्रंथ या पौराणिक कथा तक सीमित न रखकर, इसे साहित्य, दर्शन, राजनीति, समाजशास्त्र और सांस्कृतिक अध्ययन के एक व्यापक अकादमिक क्षेत्र के रूप में विकसित करना है। इस दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) पाठ्यक्रम में कुल 90 क्रेडिट होंगे।
वेदांत विभाग की प्रोफेसर डॉ. के. मनोगंगा के अनुसार, इस अनूठी पहल का मकसद युवाओं को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और संस्कृति से आधुनिक उच्च शिक्षा के माध्यम से जोड़ना है। इसमें आईएनडीआईसीए संस्था सहयोग कर रही है। इंजीनियरिंग, मेडिकल या ह्यूमैनिटीज़ समेत किसी भी स्ट्रीम के स्नातक इसमें प्रवेश ले सकते हैं, बशर्ते उन्हें महाभारत की बुनियादी समझ के साथ हिंदी, अंग्रेजी या संस्कृत भाषा पर अच्छी पकड़ हो। छात्रों को इस दौरान पांडवकाल के राज-धर्म, अर्थ-नीति, कूटनीति, नैतिकता, भाषा और खानपान जैसे विषयों पर महारत हासिल होगी। पाठ्यक्रम का उद्देश्य महाभारत को समकालीन सामाजिक प्रश्नों और जीवन की जटिल समस्याओं के समाधान के रूप में प्रस्तुत करना है ताकि युवा व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर सही निर्णय ले सकें। केंद्रीय संस्कृत विवि कराएगा महाभारत, स्टडीज में एमए प्राचीन ज्ञान-शोध पर होगा
पाठ्यक्रम को तीन प्रमुख भागों में बांटा गया
इस पीजी प्रोग्राम के तहत छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ गंभीर शोध और फील्ड वर्क का अवसर मिलेगा। पाठ्यक्रम को तीन प्रमुख भागों में बांटा गया है।
- मूल पाठ अध्ययन: महाभारत के मूल संस्कृत अंशों, साहित्यिक संरचना, संवादों और उद्योग पर्व का अध्ययन।
- शोध और स्वतंत्र अध्ययन: प्राथमिक स्रोतों की जानकारी, पाठ-विश्लेषण तथा इतिहास और दर्शन की पद्धतियों का उपयोग।
- प्रत्यक्ष सांस्कृतिक अनुभव: कुरुक्षेत्र समेत पांडवकाल से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का दौरा, लोककथाओं, परंपराओं और अभिलेखागारों का अध्ययन।
क्या ऐतिहासिक स्थलों पर भी जाना होगा?
इस पाठ्यक्रम की खास बात यह है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ सीधे अनुभव हासिल करने का अवसर भी मिलेगा। योजना के तहत कुरुक्षेत्र जैसे महाभारत से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का दौरा कराया जाएगा। छात्र वहां की लोककथाओं, परंपराओं और अभिलेखागारों का अध्ययन कर सकेंगे। इससे उन्हें किताबों में पढ़ी जानकारी और सांस्कृतिक विरासत के बीच संबंध समझने में मदद मिलेगी। शोध में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए यह तरीका खास हो सकता है, क्योंकि उन्हें मूल स्रोतों और स्थानीय परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा।
इस पाठ्यक्रम का मकसद क्या है?
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की इस पहल का उद्देश्य महाभारत को कई शैक्षणिक विषयों के साथ जोड़ना है। इसके जरिए छात्र साहित्य और दर्शन के अलावा राजनीति, समाज और संस्कृति के सवालों को भी समझ सकेंगे। पाठ्यक्रम में शोध, मूल ग्रंथों के अध्ययन और ऐतिहासिक स्थलों के अनुभव को शामिल करने की योजना है। हालांकि, प्रवेश की तारीख, आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और सीटों की संख्या जैसी जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना देखना जरूरी होगा। इच्छुक छात्रों को दाखिले से पहले विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी निर्देशों की जांच करनी चाहिए।