भाषा विषयों पर उठे सवाल
25 फरवरी को जारी किए गए सीबीएसई ड्राफ्ट नीति के अनुसार, अंग्रेजी और हिंदी को भाषा 1 और भाषा 2 के रूप में रखा गया है, जबकि अन्य सभी क्षेत्रीय और विदेशी भाषाओं को "क्षेत्रीय और विदेशी भाषाओं" के समूह में डाल दिया गया है। इस बदलाव ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सभी छात्रों के लिए इन दोनों भाषाओं को अनिवार्य बना दिया जाएगा?
ड्राफ्ट नीति में इंगित किया गया है कि अंग्रेजी और हिंदी के लिए अलग-अलग परीक्षा दिवस निर्धारित होंगे, जबकि अन्य सभी भाषाओं की परीक्षा एक ही दिन में आयोजित की जाएगी। इससे पहले पंजाब ने पंजाबी भाषा के "विलोपन" को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि यह सूची केवल "संकेतात्मक" है यानी यह अंतिम नहीं है।
सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया कि जो भी विषय और भाषाएं वर्तमान में प्रस्तावित की जा रही हैं, वे 2025-26 के लिए भी लागू रहेंगी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि क्यों अंग्रेजी को भाषा 1 और हिंदी को भाषा 2 के रूप में रखा गया है, जबकि अन्य भाषाओं को वैकल्पिक स्थान दिया गया है।