What is Dummy School: डमी स्कूल क्या है?
सीबीएसई परीक्षक राजीव कुमार सिंह बताते हैं कि डमी स्कूल ऐसे स्कूल होते हैं, जहां छात्रों को नियमित रूप से स्कूल जाने की जरूरत नहीं होती है। ये स्कूल अधिकतर कोचिंग संस्थानों द्वारा चलाए जाते हैं, ताकि छात्रों पर स्कूल के कार्यभार को कम किया जा सके। इसके लिए नियमित स्कूलों के साथ गठजोड़ किया जाता है। कोचिंग संस्थान डमी स्कूलों में छात्रों को प्रवेश दिलाकर उनपर स्कूल के कार्यभार को कम करते हैं, जिससे छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अधिक समय मिलता है। डमी स्कूलों की अवधारणा विज्ञान के छात्रों के लिए दो प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं, जेईई (IIT JEE) और नीट (NEET) के लिए सबसे लोकप्रिय है।
डमी स्कूलों में छात्रों की आम तौर पर एक दिन में दो कक्षाएं होती हैं जो हर दिन एक या दो घंटे की होती हैं, जिसमें बोर्ड परीक्षाओं और स्कूल के सिलेबस पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। बाकी समय छात्र अपने कोचिंग सेंटर में और छात्रावास आदि में पढ़ाई करने में लगाते हैं।
क्या है डमी स्कूल कारोबार की असली वजह?
अभिभावक चाहे अपने बच्चों को कितने ही प्रतिष्ठित और महंगे स्कूलों में दाखिला दिला दें, लेकिन उनके मन में यह चिंता बनी रहती है कि कोचिंग के बिना बच्चों के अच्छे अंक नहीं आ पाएंगे। डमी स्कूल कारोबार की एक बड़ी वजह यही डर है। कोचिंग संस्थानों और कुछ लालची लोगों ने अपने फायदे को देखते हुए इस अवधारणा को बढ़ाया है।
नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जब अभिभावक और छात्र इन कोचिंग संस्थानों से संपर्क करते हैं, तो उनके सामने डमी स्कूल में प्रवेश की पेशकर की जाती है।
नई नहीं है डमी स्कूल की अवधारणा
सीबीएसई परीक्षक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि डमी स्कूलों में प्रवेश की अवधारणा नई नहीं है। यह चलन लगभग पिछले डेढ़ दशक पहले भी मौजूद था। उन्होंने बताया कि यह धंधा साठ-गांठ से चलता है। निरीक्षण से पहले ही कोचिंग संस्थानों को सूचित कर दिया जाता है, जिससे वह अपने बचाव की तैयारी पहले ही कर लेते हैं।
सिंह ने बताया कि ऐसा नहीं है कि डमी स्कूलों को लेकर सीबीएसई अचानक से सख्त हुआ है। बोर्ड पहले कई बार स्कूलों को चेतावनी दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद यह चलन तेजी से बढ़ा है।
अभिभावकों का क्या कहना है?
उधर अभिभावकों ने सीबीएसई के इस फैसले पर नाराजगी दिखाई है। उनका कहना है कि सीबीएसई ने सराहनीय कदम उठाया है, लेकिन छात्रों को इसमें शामिल न करते हुए कोचिंग संस्थानों पर गाज गिरानी चाहिए थी।
अभिभावकों का कहना है कि वो जब कोचिंग संस्थानों में बच्चें का प्रवेश कराने के लिए जाते हैं तो कोचिंग संस्थान खुद डमी स्कूल में प्रवेश देने की पेशकश करते हैं। ऐसे में बच्चे के भविष्य को देखते हुए अभिभावक डमी स्कूल में प्रवेश के लिए राजी हो जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि सीबीएसई को सबसे पहले ऐसे कोचिंग संस्थानों की पहचान करनी चाहिए और उन पर कार्रवाई करनी चाहिए।
एक स्कूल की मान्यता पर कई शाखाएं चल रहीं
राजीव कुमार सिंह ने बताया कि सीबीएसई से एक स्कूल की मान्यता लेकर फर्जी तरीके से उसकी कई शाखाएं चलाई जाती हैं। शिक्षा विभाग की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में अवैध स्कूलों के संचालन का खुलासा हो चुका है। अब सीबीएसई ने कड़ा रूख अपनाते हुए यह निर्णय लिया है कि इन स्कूलों में नामांकित 12वीं के छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी सकती।
पिछले साल 29 स्कूलों में किया था औचक निरीक्षण
सीबीएसई ने पिछले साल दिसंबर 2024 में दिल्ली, बेंगलुरु, वाराणसी, बिहार, गुजरात और छत्तीसगढ़ के 29 स्कूलों में 'डमी' छात्रों के नामांकन की जांच के लिए कई औचक निरीक्षण किए थे। जिनमें कई छात्र स्कूल में अनुपस्थि मिले थे। बोर्ड ने कई स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था।
इन निरीक्षणों का प्राथमिक उद्देश्य सीबीएसई के मानदंडों और संबद्धता उपनियमों के अनुपालन का आकलन करना था। यह निरीक्षण 29 टीमों ने किया था। निरीक्षण टीमों ने छात्र नामांकन रिकॉर्ड, बुनियादी सुविधाओं और स्कूलों के समग्र कामकाज को सत्यापित करने पर ध्यान केंद्रित किया। निरीक्षण के बाद बोर्ड ने दिल्ली के 18 स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।