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...तो क्या निजी और सरकारी स्कूलों के बीच भेदभाव कर रहा है सीबीएसई, जानें क्यों छिड़ा विवाद

Thu, 01 Aug 2019 11:49 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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सीबीएसई
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के एक नियम को लेकर इन दिनों विवाद चल रहा है। यह विवाद निजी स्कूलों और बोर्ड के बीच है। कुछ निजी स्कूलों के प्राचार्यों का कहना है कि बोर्ड उनके और सरकारी स्कूलों के बीच भेदभाव कर रहा है, जो बिल्कुल गलत है। कोई भी नियम बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

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दरअसल, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बोर्ड ने निर्देश दिया है कि वे एक क्लास में 40 से ज्यादा स्टूडेंट्स नहीं रख सकते। अगर इससे ज्यादा स्टूडेंट्स हुए तो बोर्ड उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

सीबीएसई ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन स्कूलों में बोर्ड द्वारा तय की गई सीमा (40 विद्यार्थी प्रति क्लास) से ज्यादा दाखिले होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के अनुसार, स्कूलों पर ये सख्ती शैक्षणिक सत्र 2020 से लागू की जाएगी।
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जानें, किस बात को लेकर छिड़ा है विवाद

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सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीबीएसई बस ये चाहता है कि उसके बनाए नियमों का सभी संबद्ध स्कूलों में पालन हो। अगल निजी स्कूल तय सीमा से ज्यादा दाखिले लेते हैं, तो उन्हें शिक्षा का अधिकार (आरटीई) एक्ट के तहत सीबीएसई के नियम का उल्लंघन करने पर इसका जवाब जरूर देना होगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड केंद्रीय विद्यालयों व अन्य सरकारी स्कूलों को इस मामले में थोड़ी छूट दे रहा है क्योंकि वे कई बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते हैं। मुनाफा कमाने के लिए दाखिले नहीं लेते।

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हालांकि बोर्ड के इस फैसले पर सीबीएसई स्कूलों के प्राचार्यों नाराज हैं। उनका कहना है कि बोर्ड इस तरह निजी व सरकारी स्कूलों के बीच पक्षपात नहीं कर सकता। क्योंकि आरटीई एक्ट और सीबीएसई के नियम सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए बनाए गए हैं।

बता दें कि हाल में बोर्ड ने एक सर्कुलर जारी करते हुए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) की जानकारी दी है। जिसके अनुसार, किसी सीबीएसई स्कूल में कक्षा 9वीं और 11वीं में प्रवेश मिलेगा या नहीं, इस मामले में बोर्ड अहम भूमिका निभाएगा।

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