सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीबीएसई बस ये चाहता है कि उसके बनाए नियमों का सभी संबद्ध स्कूलों में पालन हो। अगल निजी स्कूल तय सीमा से ज्यादा दाखिले लेते हैं, तो उन्हें शिक्षा का अधिकार (आरटीई) एक्ट के तहत सीबीएसई के नियम का उल्लंघन करने पर इसका जवाब जरूर देना होगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड केंद्रीय विद्यालयों व अन्य सरकारी स्कूलों को इस मामले में थोड़ी छूट दे रहा है क्योंकि वे कई बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते हैं। मुनाफा कमाने के लिए दाखिले नहीं लेते।
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हालांकि बोर्ड के इस फैसले पर सीबीएसई स्कूलों के प्राचार्यों नाराज हैं। उनका कहना है कि बोर्ड इस तरह निजी व सरकारी स्कूलों के बीच पक्षपात नहीं कर सकता। क्योंकि आरटीई एक्ट और सीबीएसई के नियम सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए बनाए गए हैं।
बता दें कि हाल में बोर्ड ने एक सर्कुलर जारी करते हुए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) की जानकारी दी है। जिसके अनुसार, किसी सीबीएसई स्कूल में कक्षा 9वीं और 11वीं में प्रवेश मिलेगा या नहीं, इस मामले में बोर्ड अहम भूमिका निभाएगा।
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