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CBSE: बोर्ड परीक्षाओं में संबद्ध स्कूलों के खराब प्रदर्शन के बाद सीबीएसई त्रिपुरा में खोलेगा कार्यालय, जानें

Mon, 04 Nov 2024 03:03 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अपने से संबद्ध त्रिपुरा के सरकारी स्कूलों के परीक्षाओं में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अगरतला में एक उप-क्षेत्रीय कार्यालय खोलेगा। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। शिक्षा विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी अभिजीत समाजपति ने कहा, कि कार्यालय अस्थायी रूप से रामकृष्ण मिशन विद्यालय की एक इमारत से संचालित होगा।
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सीबीएसई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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CBSE: सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में इससे संबद्ध सरकारी स्कूलों के निराशाजनक प्रदर्शन पर नाराजगी के बीच अगरतला में एक उप-क्षेत्रीय कार्यालय खोलेगा। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

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2018 में त्रिपुरा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, 125 सरकारी स्कूलों का नाम बदलकर विद्याज्योति स्कूल कर दिया गया और सीबीएसई का अंग्रेजी-माध्यम पाठ्यक्रम पेश किया गया।

इस साल, जहां इन स्कूलों के 61 प्रतिशत छात्र सीबीएसई कक्षा 10 की परीक्षा में सफल हुए, वहीं 59 प्रतिशत छात्र 12वीं कक्षा की परीक्षा में सफल रहे।

इन स्कूलों में शिक्षा का माध्यम पहले बंगाली था, और ये त्रिपुरा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (TBSE) के तहत कार्य करते थे।

शिक्षा विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) अभिजीत समाजपति ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में शैक्षिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सीबीएसई कार्यालय के लिए उपयुक्त भूमि आवंटित करेगी।
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उन्होंने कहा, कि कार्यालय अस्थायी रूप से रामकृष्ण मिशन विद्यालय की एक इमारत से संचालित होगा।

समाजपति ने कहा, उप-क्षेत्रीय कार्यालय सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों को प्रवेश सहायता, विषय सुधार, छात्र रिकॉर्ड अपडेट, परीक्षा केंद्र समन्वय, मार्क शीट सुधार, शिकायत निवारण और शिक्षक प्रशिक्षण सुविधा सहित विभिन्न सेवाएं प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा, "परीक्षा प्रक्रिया और छात्र विकास गतिविधियों के सुचारू संचालन में सहायता के लिए यह राज्य शिक्षा निकायों और अन्य क्षेत्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा। यह पहल एक मजबूत शैक्षिक माहौल को बढ़ावा देगी और पूरे राज्य में छात्रों के लिए सीखने के अवसरों का विस्तार करेगी।"

खराब नतीजों के बाद, विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार उन हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है, जिन्होंने आठवीं कक्षा तक बंगाली-माध्यम स्कूलों में पढ़ाई की और उन्हें अंग्रेजी में बोर्ड परीक्षाओं में बैठने के लिए मजबूर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह आपदा आई। 

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