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CBSE: दोहरी परीक्षा के फैसले से खुश छात्र, लेकिन शिक्षकों के लिए बढ़ सकती है चुनौती! जानें प्रतिक्रिया

Thu, 27 Feb 2025 09:41 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE: साल में दो बार परीक्षा कराने के निर्णय को छात्रों और स्कूल प्रधानाचार्यों ने सकारात्मक बताया है। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि इससे शिक्षकों के लिए चुनौती बढ़ सकती है। आइए जानते हैं बोर्ड के इस निर्णय पर कौन क्या बोला...
 
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साल में दो बार परीक्षा से खुश छात्र, जानें निर्णय पर क्या रही प्रतिक्रिया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने साल 2026 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा को वर्ष में दो बार आयोजित करने की मंजूरी दे दी है। छात्रों और स्कूल प्रधानाचार्यों ने इस फैसले को सकारात्मक बताया है, क्योंकि यह छात्रों को अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए अतिरिक्त अवसर प्रदान करेगा।

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CBSE ने जारी किए ड्राफ्ट नियम, 9 मार्च तक सुझाव मांगे

CBSE ने मंगलवार को इन नए ड्राफ्ट नियमों को मंजूरी दी। ये नियम अब सार्वजनिक डोमेन में रखे जाएंगे और इच्छुक पक्ष 9 मार्च तक अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके बाद, अंतिम नीति तय की जाएगी। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार:
  • पहला चरण: 17 फरवरी से 6 मार्च 2026 के बीच आयोजित होगा।
  • दूसरा चरण: 5 मई से 20 मई 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा।

छात्रों और शिक्षकों की राय

आईटीएल इंटरनेशनल स्कूल, द्वारका की प्रधानाचार्या सुधा आचार्य ने इस कदम को छात्रों के हित में बताया। उन्होंने कहा, "दोहरी परीक्षा प्रारूप छात्रों के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि यह परीक्षा के दबाव को कम करेगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में स्टैंडर्ड मैथ्स लेता है और कठिनाई महसूस करता है, तो वह दूसरी परीक्षा में बेसिक मैथ्स चुन सकता है और पास होने की संभावना बढ़ा सकता है।"

उन्होंने आगे कहा कि पहले छात्रों को केवल एक ही मौका मिलता था, लेकिन अब वे परीक्षा के उच्च दबाव से बच सकते हैं।
 

निर्णय से खुश छात्र

आईटीएल स्कूल के कक्षा 8 के एक छात्र ने कहा, "क्योंकि दोनों परीक्षाओं में से सर्वश्रेष्ठ अंकों को माना जाएगा, तो हम अपनी तैयारी की बेहतर रणनीति बना सकते हैं। मैं पहली परीक्षा में गणित, अंग्रेजी और विज्ञान पर ध्यान केंद्रित करूंगा और बाकी विषयों को अगली परीक्षा में रखूंगा।"

वहीं, कक्षा 9 के एक छात्र ने कहा, "इस प्रणाली से हमें अधिक मौके मिलेंगे। अगर मैं पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका, तो अगली परीक्षा में सुधार कर सकता हूं।"
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शिक्षकों के लिए नई चुनौतियां

विद्या बाल भवन स्कूल, मयूर विहार के प्रधानाचार्य एस.वी. शर्मा ने इस बदलाव को छात्रों के लिए फायदेमंद, लेकिन शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा, "इस नई प्रणाली से छात्रों का तनाव जरूर कम होगा, लेकिन शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ सकता है। उन्हें फरवरी में बोर्ड परीक्षाओं की कॉपी जांचनी होगी, मार्च में निचली कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं लेनी होंगी और फिर मई में दूसरी बोर्ड परीक्षा देखनी होगी।"

शर्मा ने यह भी कहा कि इससे शिक्षकों की गर्मी की छुट्टियां प्रभावित हो सकती हैं और उनके काम का दबाव बढ़ सकता है।
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