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CBSE OSM Row: ओएसएम पोर्टल पर सवाल उठाने वाला छात्र पहुंचा संसद, समिति के सामने रखीं सिस्टम की खामियां

Tue, 02 Jun 2026 03:46 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE: सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर छात्र सार्थक सिद्धांत ने संसदीय समिति के सामने कथित टेंडर गड़बड़ियों और मूल्यांकन संबंधी समस्याओं को उठाया। उन्होंने दावा किया कि ओएसएम टेंडर की कई शर्तों में बदलाव किए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।
 
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CBSE OSM Row - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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CBSE OSM Row: सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति के सामने पेश होकर ओएसएम सिस्टम और उससे जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर अपनी प्रस्तुति दी।

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संसद भवन एनेक्सी में आयोजित बैठक में समिति सीबीएसई की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में लागू ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और छात्रों द्वारा उठाई गई पारदर्शिता व मूल्यांकन संबंधी चिंताओं की समीक्षा कर रही है।

छात्र ने टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

बैठक से पहले सार्थक सिद्धांत ने दावा किया कि सीबीएसई के विभिन्न टेंडर दस्तावेजों की तुलना करने पर कई विसंगतियां सामने आई हैं। उनके अनुसार इन बदलावों से एक विशेष सेवा प्रदाता को फायदा पहुंचाने की आशंका दिखाई देती है।

सार्थक ने कहा कि उन्होंने अपने ब्लॉग में कम से कम 15 विसंगतियों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि समिति के सामने वे इनमें से तीन से चार प्रमुख मुद्दों को विस्तार से रखेंगे।

टेंडर की शर्तों में बदलाव का आरोप

छात्र ने आरोप लगाया कि ओएसएम प्रणाली से जुड़े नए टेंडर दस्तावेजों में कई महत्वपूर्ण शर्तों को बदल दिया गया। उनके मुताबिक पुराने टेंडर में खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को अयोग्य घोषित करने से संबंधित तीन महत्वपूर्ण शर्तें थीं, लेकिन नए आरएफपी (RFP) में इन प्रावधानों को पूरी तरह हटा दिया गया।

सार्थक ने यह भी दावा किया कि ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय पात्रता सीमा, CMMI स्तर और प्रोजेक्ट पात्रता से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए।

एथिकल हैकर और पत्रकारों के साथ किया अध्ययन

सार्थक सिद्धांत ने बताया कि इस मामले पर उनका अध्ययन एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी और इस विषय की जांच कर रहे कुछ पत्रकारों के सहयोग से किया गया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पूरे मुद्दे से सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया और शिक्षा मूल्यांकन प्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाने की दिशा में चर्चा आगे बढ़ेगी।

ओएसएम सिस्टम का विरोध नहीं, बेहतर तैयारी की मांग

सार्थक ने साफ किया कि वे ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि यह एक अच्छा बदलाव हो सकता है, लेकिन इसे लागू करने से पहले बड़े स्तर पर परीक्षण और डेमो पायलट किए जाने चाहिए थे।

उन्होंने कहा, 'ओएसएम एक अच्छा बदलाव है, लेकिन इसे लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर ट्रायल और पायलट प्रोजेक्ट होने चाहिए थे।'
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तीन-भाषा फॉर्मूला की भी समीक्षा

सूत्रों के अनुसार संसदीय समिति कक्षा 9वीं और 10वीं में लागू तीन-भाषा फॉर्मूला की समीक्षा भी कर रही है। समिति शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर फीडबैक और सुझाव एकत्र कर रही है।

सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर बढ़ती बहस के बीच अब सभी की नजर संसदीय समिति की आगामी सिफारिशों पर टिकी हुई है।
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