मातृभाषा क्यों है जरूरी?
सर्कुलर में कहा गया है कि छोटे बच्चे अपने घर की भाषा में ही सबसे तेजी से और गहराई से कॉन्सेप्ट को समझ पाते हैं। इसलिए शुरुआती शिक्षा में मातृभाषा का उपयोग बच्चे की सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और समझ को कई गुना बढ़ा सकता है।
जल्द बनेगी NCF कार्यान्वयन समिति
सीबीएसई ने सभी स्कूलों को मई 2025 के अंत तक ‘एनसीएफ कार्यान्वयन समिति’ (NCF Implementation Committee0 गठित करने को कहा है। ये समिति छात्रों की मातृभाषा की पहचान करेगी और भाषा संसाधनों की मैपिंग करेगी। साथ ही, स्कूलों को लैंग्वेज मैपिंग एक्सरसाइज भी जल्द से जल्द पूरी करने के लिए कहा गया है।
मातृभाषा के उपयोग को प्राथमिकता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2023 (NCFSE 2023) दोनों ही प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा के उपयोग को प्राथमिकता देने की सिफारिश करते हैं। विशेष रूप से 8 वर्ष की आयु तक की फाउंडेशनल स्टेज में, यह माना गया है कि बच्चे अपनी घरेलू भाषा में सबसे तेजी से और गहराई से अवधारणाओं को समझते हैं। NCFSE 2023 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि शिक्षा का प्राथमिक माध्यम बच्चे की घर की भाषा, मातृभाषा या कोई परिचित भाषा होनी चाहिए, ताकि उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली और सहज बन सके।