समावेशन और बदलते शिक्षा माहौल पर फोकस
CBSE ने कहा कि नए पेरेंटिंग कैलेंडर में अभिभावकों और स्कूलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए नई गतिविधियां जोड़ी गई हैं। इसमें शिक्षकों की निगरानी में कार्यक्रम और छात्रों के मानसिक, सामाजिक व शैक्षणिक विकास को बेहतर बनाने के लिए विशेष पहलें शामिल हैं। साथ ही, आज के समय में बच्चों की परवरिश के दौरान माता-पिता को आने वाली चुनौतियों से निपटने में भी यह कैलेंडर उनकी मदद करेगा।
इसके दायरे को बेहतर बनाने के लिए इसमें नए हिस्से जोड़े गए हैं। इनमें अलग-अलग तरह के सीखने वालों के लिए बराबरी वाले तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के मकसद से 'समावेशन' (inclusion) पर खास हिस्से और माता-पिता व छात्रों को बदलते सिलेबस और पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी उम्मीदों के हिसाब से ढलने में मदद करने के लिए 'बदलावों का सामना करने' (coping with changes) से जुड़े हिस्से शामिल हैं।
स्कूलों से कैलेंडर अपनाने की अपील
माता-पिता के लिए वर्कशॉप वाले हिस्से को भी विकास से जुड़े नज़रिए के साथ और मजबूत किया गया है, जिससे स्कूल उम्र और हालात के हिसाब से सही जुड़ाव वाले प्रोग्राम बना सकें।
CBSE के अनुसार, इस कैलेंडर को इस तरह से बनाया गया है कि इससे माता-पिता और बच्चे के बीच सार्थक बातचीत को बढ़ावा मिले, घर और स्कूल के बीच साझेदारी मजबूत हो और माता-पिता अपने बच्चे के विकास के सफर में सक्रिय रूप से शामिल हो सकें।
बोर्ड ने कहा, "कुल मिलाकर, इस पहल का मकसद एक ऐसा माहौल बनाना है जो हर सीखने वाले के सर्वांगीण विकास, भलाई और मुश्किलों का सामना करने की क्षमता को बढ़ावा दे।"
बोर्ड ने बताया कि यह कैलेंडर उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। साथ ही, बोर्ड ने उससे जुड़े स्कूलों से अपील की है कि वे छात्रों के लिए एक ऐसा माहौल बनाने के लिए इसे अपनाएं और लागू करें जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद करे, सबको साथ लेकर चले और उन्हें सहयोग दे।