किन देशों के लिए लागू है यह व्यवस्था?
यह नई प्रणाली बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में पढ़ने वाले छात्रों पर लागू होगी।
कैसे तैयार होगा रिजल्ट?
सीबीएसई ने छात्रों को इस आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा है कि उन्होंने कितनी परीक्षाएं दी हैं।
- जिन छात्रों ने सभी विषयों की परीक्षा दी है, उनका रिजल्ट सामान्य तरीके से बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर तैयार होगा।
- जो छात्र कुछ पेपर नहीं दे पाए, उनके लिए स्कूल आधारित मूल्यांकन अपनाया जाएगा।
स्कूल आधारित मूल्यांकन का तरीका
ऐसे छात्रों के लिए स्कूल द्वारा लिए गए टेस्ट जैसे त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंक जोड़े जाएंगे।
- जिन विषयों में थ्योरी 70 या 80 अंकों की है, उनमें इन तीनों परीक्षाओं में से सबसे अधिक अंक को अंतिम परिणाम में शामिल किया जाएगा।
- जिन विषयों में थ्योरी 60, 50 या 30 अंकों की है, उनमें केवल अंतिम प्री-बोर्ड के अंक जोड़े जाएंगे। यदि छात्र प्री-बोर्ड में शामिल नहीं हुआ है, तो पहले के प्री-बोर्ड के अंक लिए जाएंगे।
प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट के अंक पहले की तरह ही अंतिम परिणाम में जोड़े जाएंगे।
स्कूलों की भूमिका और जिम्मेदारी
इस पूरी प्रक्रिया में स्कूलों की भूमिका अहम होगी। स्कूलों को छात्रों के सभी आंतरिक मूल्यांकन, प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड को सही तरीके से संकलित करना होगा। CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे पूरी पारदर्शिता और सावधानी के साथ यह प्रक्रिया पूरी करें।
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छात्रों के लिए जरूरी सलाह
छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने स्कूलों के संपर्क में रहें और मूल्यांकन प्रक्रिया व रिजल्ट से जुड़ी हर अपडेट पर नजर बनाए रखें। सीबीएसई की यह पहल सुनिश्चित करती है कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो और उन्हें समय पर परिणाम मिल सके।