कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि छात्र केवल अपने मूल अंक के परिणामों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं और यदि सुधार परीक्षा में उनके द्वारा कम अंक प्राप्त करने पर विचार किया जाता है तो उनके द्वारा लिए गए प्रवेश प्रभावित होंगे।
बोर्ड ने कोर्ट में क्या कहा?
सीबीएसई ने अपने जवाबी हलफनामे में पीठ को बताया कि उसने अपनी नीति में आंशिक संशोधन किया है ताकि सुधार परीक्षा में 'असफल' होने वाले छात्रों को अपना 'पास' परिणाम बरकरार रखने की अनुमति मिल सके, जो उन्हें बोर्ड परीक्षा रद्द होने के बाद तैयार की गई मूल्यांकन नीति के आधार के अनुसार मिला था।
मूल्यांकन नीति के आधार पर तैयार हुआ था परिणाम
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर की वजह से शैक्षणिक सत्र 2020-21 की बोर्ड परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। जिसके बाद बोर्ड द्वारा छात्रों का अंतिम परिणाम तैयार करने के लिए वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति का विकल्प चुना गया था। इसी मूल्यांकन नीति के आधार पर कक्षा बारहवीं, दसवीं के छात्रों का अंतिम परिणाम तैयार किया गया था।