सीबीएसई ने यह कदम उस वक्त उठाया है, जब हाल ही में नीति आयोग की एक रिपोर्ट में दिल्ली, बंगलूरू, चेन्नई और हैदराबाद समेत देश के 21 शहरों में 2020 तक भूजल के स्तर में भारी गिरावट आने को लेकर चिंता जताई गई थी। इसमें कहा गया था कि इससे देश के करीब 10 करोड़ लोग पानी की कमी से प्रभावित होंगे।
स्कूलों को बनानी होगी समिति
जल का बेहतर इस्तेमाल करने वाले स्कूलों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे स्कूल जल प्रबंधन समिति का गठन करें। उसमें स्कूल प्रशासन, शिक्षक, छात्र, गैर शिक्षक स्टाफ, अभिभावक और समुदायों के कुछ लोगों को शामिल करें। यह समिति स्कूलों में पानी के बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने, उसकी समय-समय पर समीक्षा करने और पानी की बर्बादी की निगरानी कर उस पर रोक लगाने और जल संरक्षण के उपायों अपनाना सुनिश्चित करेगी।
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वॉटर ऑडिट करानी होगी
अधिकारी ने बताया कि स्कूलों को नियमित तौर पर नए मानदंडों के मुताबिक वाटर ऑडिट करानी होगी, ताकि वे अपने यहां जल संरक्षण के उपायों का सख्ती से पालन कर सकें। इसमें स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्कूल में मौजूद हरे-भरे क्षेत्रों में सिंचाई के तौर-तरीकों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, स्कूलों में पानी के दोबारा इस्तेमाल करने के उपकरणों, देसी और सूखारोधी पौधों को लगाए जाने पर जोर दिया जाएगा।