CBSE On-Screen Marking: सीबीएसई की 12वीं कक्षा की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया से जुड़े मामले में गठित जांच समिति 27 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। रिपोर्ट के आधार पर कई अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा होने और जिम्मेदारी तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
CBSE: नीट पेपर लीक में एनटीए के 47 कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद अब सीबीएसई के 12वीं कक्षा की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) मामले में कई अफसरों पर गाज गिर सकती है।
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जांच के लिए बनी क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष राधा चौहान की उच्चस्तरीय समिति 27 अगस्त को सरकार को रिपोर्ट सौंप सकती है। रिपोर्ट से राज खुलेगा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई, कौन-कौन से कर्मचारी इसमें लिप्त हैं। माना जा रहा है कि सरकार नीट की तरह इस मामले में भी कड़ी कार्रवाई से नजीर पेश कर सकती है। इससे शिक्षा मंत्रालय से सीबीएसई में बड़े बदलाव हो सकते हैं।
तीन सवालों के जवाब में उलझे जिम्मेदार
क्या किसी खास कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए तकनीकी प्रमाणन और सालाना कारोबार से जुड़ी पात्रता शर्तें कमजोर की गईं? पहले टेंडर में कोई बोली नहीं मिली। दूसरे में कोई बोलीदाता तकनीकी रूप से योग्य नहीं पाया गया। तब, अगस्त 2025 में तीसरा टेंडर जारी हुआ, जिसमें कुछ अहम शर्तों में बदलाव किया गया। इसके बाद कोएम्प्ट एडुटेक को काम मिला।
शर्तों में बदलाव के बाद विवादित कंपनी को काम देने का फैसला किन अफसरों की सहमति से हुआ?
लाखों उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन की व्यवस्था लागू करने से पहले क्या पर्याप्त परीक्षण किया गया था? स्कूलों और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया था या नहीं?
ओएसएम का भविष्य भी तय करेगी रिपोर्ट
रिपोर्ट तय करेगी कि 2027 की बोर्ड और दूसरी परीक्षाओं में ओएसएम जारी रहेगी या नहीं। दरअसल, इस वर्ष 98 लाख कॉपियां डिजिटल जांची गईं। कई छात्रों ने पन्ने बदलने, गायब होने और धुंधले होने की शिकायतें कीं, तो ओएसएम सवालों के घेरे में आ गई। शीर्ष कोर्ट ओएसएम पर एक याचिका पर 21 को सुनवाई करेगा।