सीबीएसई की 12वीं कक्षा की परीक्षा केंद्र सरकार रद्द कर चुकी है और छात्रों के मूल्यांकन नीति बनाने के लिए समिति का गठन कर दिया गया है। इस समिति को नीति तैयार करने में कम-से-कम दो सप्ताह का समय लगेगा। इसलिए छात्रों को परेशान नहीं होना चाहिए, अभी नतीजे जारी होने में थोड़ा समय लगेगा।
इन सबके बीच 12वीं के छात्रों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।
जैसे: परिणाम कब तक जारी होंगे? अगर अंकों से संतुष्ट नहीं हैं तो कब तक दे पाएंगे परीक्षा? क्या इस बार दिल्ली विश्वविद्यालय अपने कटऑफ को कम करेगा? विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में उठ रहे ऐसे तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए अमर उजाला की डिजिटल टीम ने
सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी से खास बातचीत की। हमने उनसे वह सवाल पूछे जो बारहवीं कक्षा के कई छात्रों ने अमर उजाला डिजिटल के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा ईमेल के जरिये पूछे थे। पढ़िए उनके जवाब:
1. कक्षा बारहवीं के लिए कब तक तैयार होगी मूल्यांकन नीति?
मूल्यांकन नीति बनाने के लिए कमेटी का गठन हो गया है। कमेटी को नीति तैयार करने में कम-से-कम दो सप्ताह का समय लगेगा। इसके बाद इसे विद्यालयों को भेजा जाएगा और फिर एक निश्चित समय सीमा के अंदर परिणामों की घोषणा की जाएगी।
2. सीबीएसई द्वारा परिणामों की घोषणा कब की जाएगी?
विश्वविद्यालयों द्वारा अगस्त में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाती है। बोर्ड इससे पहले ही परिणामों की घोषणा कर देगी।
3. मूल्यांकन नीति से परिणाम घोषित करने तक की प्रक्रिया में समय क्यों लग रहा है?
किसी भी विद्यार्थी के जीवन में कक्षा बारहवीं के अंक काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इन अंकों के आधार पर ही वह विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं। इसलिए इन परिणामों को तैयार करने की नीति में छोटी-छोटी गलती भी विद्यार्थियों को नुकसान पहुंचा सकती है। यही कारण है कि सीबीएसई को इतना समय लग रहा है। सीबीएसई एक पारदर्शी और ऐसी नीति बनाने की कोशिश कर रही है जिससे किसी भी विद्यार्थी का नुकसान न हो।
5. क्या अंकों से असंतुष्ट होने पर विद्यार्थी परीक्षा दे सकेंगे?
जी हां, अगर विद्यार्थी अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, तो कोरोना महामारी की स्थिति सामान्य होने पर विद्यार्थी परीक्षा दे सकते हैं।
6. मूल्यांकन के आधार पर मिले अंकों से असंतुष्ट विद्यार्थी अगर परीक्षा देता है और उसमें उसके और कम अंक आते हैं, तो कौन-से अंकों के आधार पर परिणाम तैयार किया जाएगा?
कोरोना के पहले अगर कोई विद्यार्थी इम्प्रूवमेंट परीक्षा देता था, तो नए अंकों को ही माना जाएगा। यानी अगर किसी विद्यार्थी को 80 फीसदी अंक मिलते हैं और वह इम्प्रूवमेंट परीक्षा देने के लिए आवेदन करता है। तो इम्प्रूवमेंट में प्राप्त अंकों को ही अंतिम माना जाएगा। यानी अगर उसके इम्प्रूवमेंट में 70 फीसदी अंक आते हैं, तो मार्कशीट में 70 फीसदी ही लिखा जाएगा। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान अगर कोई विद्यार्थी इम्प्रूवमेंट के लिए आवेदन करता है, तो उसकी मार्कशीट कैसे तैयार होगी इसका निर्णय अभी किया जाएगा।
7. भविष्य में मार्कशीट के कारण विद्यार्थियों को समस्या न आए इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि मार्कशीट पर लिखा जाए कि विद्यार्थियों को कोरोना महामारी के दौरान प्रमोट किया गया है। क्या ऐसा होगा?
मार्कशीट में कोरोना काल का जिक्र किया जाएगा तो कहीं-न-कहीं बच्चे हतोत्साहित होंगे। कोरोना महामारी की वजह से सीबीएसई परीक्षा आयोजित नहीं कर पाई, इसमें विद्यार्थियों का कोई दोष नहीं है। मेरा मानना है कि तीन घंटे की परीक्षा से आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम तैयार करना ज्यादा बेहतर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी इसका जिक्र किया गया है।
8. कुछ विद्यार्थी परीक्षा रद्द होने से नाखुश हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
विद्यार्थियों की सारी समस्याओं से सीबीएसई अवगत है और बोर्ड इसके आधार पर ही मूल्यांकन नीति तैयार करेगा। बच्चे अंकों की वजह से ज्यादा परेशान है। अगर हमारी परीक्षा प्रणाली इस चीज को प्रमोट करती है तो इसे बदलने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इस बदलाव का जिक्र है कि तीन घंटे की परीक्षा पर दबाव कम किया जाए, ताकि बच्चे सालभर रचनात्मक कार्यों और सीखने में समय लगाएं।