मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में केरल के एक शिक्षक टोनी जोसेफ द्वारा याचिका दायर की गई है। आधिकारिक सूचना के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा आयोजित की जाने वाली कक्षा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा को रद्द करने के विरुद्ध में यह जनहित याचिका दाखिल की गई है।
परीक्षा रद्द करना विद्यार्थियों के लिए अनुचित निर्णय
याचिकाकर्ता के अनुसार, कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा एक विद्यार्थी के जीवन का अभिन्न अंग होने के साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण है। इसे रद्द करना छात्रों के लिए एक अनुचित निर्णय होगा।
बीते सप्ताह बोर्ड परीक्षा रद्द करने के लिए दायर हुई थी याचिका
पिछले हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट में वकील ममता शर्मा द्वारा एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में सीबीएसई और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) द्वारा आयोजित की जाने वाली कक्षा बारहवीं की परीक्षा को रद्द करने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार बोर्ड को ऑब्जेक्टिव मेथाडोलॉजी के जरिए विद्यार्थियों का अंतिम परिणाम तैयार करना चाहिए।
ममता शर्मा द्वारा दायर याचिका के विरोध में दाखिल की याचिका
जोसेफ द्वारा मंगलवार को अधिवक्ता ममता शर्मा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के विरोध में नई याचिका दायर की गई है। जोसेफ का कहना है कि शिक्षाविदों और संस्थानों के प्रमुखों का एक बड़ा वर्ग परीक्षा आयोजित करने के पक्ष में है। शैक्षिक विशेषज्ञों ने कहा है कि परीक्षा रद्द नहीं की जानी चाहिए और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके आयोजित की जानी चाहिए। आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम तैयार करना "अनुचित" होगा, क्योंकि 2021-22 शैक्षणिक वर्ष में, शायद ही किसी शिक्षक ने छात्रों को शारीरिक रूप से देखा हो।
अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है - सीबीएसई
सीबीएसई ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि बोर्ड द्वारा अभी तक कक्षा बारहवीं के विद्यार्थियों के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जब ऐसा निर्णय लिया जाएगा तो विद्यार्थियों को आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया जाएगा।