जनगणना और जातिगत जनगणना में क्या अंतर है?
सामान्य जनगणना (Census) हर 10 साल में होती है जिसमें देश की कुल जनसंख्या, लिंग, आयु, शिक्षा, निवास आदि की जानकारी ली जाती है। लेकिन जातिगत जनगणना विशेष रूप से जातियों की संख्या और स्थिति पर केंद्रित होती है।
पिछली बार जातिगत जनगणना कब हुई थी?
भारत में 1931 में ब्रिटिश काल के दौरान अंतिम बार पूरी जातिगत जनगणना हुई थी। इसके बाद 2011 में सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) की गई थी, लेकिन उसमें जातिगत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए।
कौन कराता है जातिगत जनगणना?
भारत में जनगणना कार्य भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना आयुक्त (Registrar General and Census Commissioner of India) द्वारा कराया जाता है। हालाँकि, जातिगत जनगणना पर निर्णय सरकार की नीति पर निर्भर करता है। हाल के वर्षों में बिहार जैसे कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर जातिगत सर्वेक्षण कराए हैं।