अतिथि वक्ता : तरुण नेहरा, पूर्व जोनल हेड उत्तरी, पश्चिमी भारत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज
विषय : लीडरशिप डेवलपमेंट फॉर इमर्जिंग लीडर्स
सफलता.कॉम द्वारा लीडरशिप डेवलपमेंट फॉर इमर्जिंग लीडर्स विषय पर आयोजित सफलता टाक मास्टर क्लास में अतिथि वक्ता पूर्व जोनल हेड उत्तरी, पश्चिमी भारत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज तरूण नेहरा ने कहा कि आजकल के समय में लीडरशिप बहुत तेजी से बदल रही है। जो चीजें कुछ साल पहले तक प्रभावी होती थीं आज हम उनके साथ में नहीं चल सकते। क्योंकि अब हमें हमेशा खुद को स्किल करते रहना होता है। अपग्रेड करना पड़ता है, खुद को बढ़ाना पड़ता है। इसके दो कारण है। पहले जो इंडस्ट्री में गैप रहता था वो 20 साल रहता था। अब वो गैप 4- 5 साल रह गया है। जो लीडरशिप रोल 1998 में था अब नहीं है। तब के लीडर अधिकतम दो पीढ़ियों को हैंडल करते थे। आजकल के लीडर 4 पीढ़ियों को हैंडल करते हैं। आज के लीडर्स के काम करने का हर तरीका, सीखने का तरीका, एक्ट करने का तरीका पहले से बहुत अलग है।
उन्होंने कहा कि स्टीफन आर कोवी की एक किताब है जिसे सभी को पढ़ना चाहिए। जिसका नाम है प्रिंसिपल सेंटर्ड लीडरशिप। जिसमें लीडरशिप के 4 प्रिंसिपल बताए गए हैं।
1- आप अपनी टीम को गाइडेंस दें।
2- अपनी टीम को विजन दें।
3- अपनी टीम को सुरक्षा प्रदान करें।
4- अपनी टीम को प्रोत्साहित करें।
ये किसी भी लीडरशिप के लिए फाउंडेशन की तरह है। जो कभी नहीं बदलता।
उन्होंने कहा कि कई बार संस्थानों में लोग ज्वाइन करने के 1-2 साल बाद नौकरी छोड़ देते हैं। उसका कारण है कि उन्हें संस्थान द्वारा एक बड़ा लक्ष्य नहीं दिखाया गया। उन्हें कंपनी का एक लार्जर विजन दिखाएं और उनके विजन को आपके विजन से जोड़ें। जरूरत है उन्हें आपके साथ कनेक्ट करने की, तो आज की जनरेशन पूरी उर्जा के साथ आपकी कंपनी में काम करेगी। क्योंकि आज की जनरेशन जो है वो पुरानी जनरेशन्स से ज्यादा बुद्धिमान औऱ मेहनतकश है।
2020 से जबसे देश में रिमोट वर्किंग शुरू हुआ है तबसे रिमोट वर्किंग का एक अलग परिदृश्य उभर का सामने आया है। क्योंकि जब आप आमने सामने काम करते हैं तो वातावरण अलग होता है। तब आप अपने ऑफिस के कल्चर को अपनी टीम में आसानी से पहुंचा सकते हैं। लेकिन रिमोट वर्क कर रही टीम में कई बार ऐसा हो रहा है कि ऑनलाइन ही ज्वाइनिंग हुई ऑनलाइन ही काम चल रहा है। आपस में मिलने का समय ही नहीं है। आप ऑफलाइन कर्मचारियों के घर परिवार के बारे में जानकारी रख सकते हैं जब भी मिलें उनसे बात करके उनके हाल चाल पूछ सकते हैं। लेकिन वर्चुअल मीटिंग में तय समय पर लोग ज्वाइन होते हैं और तय समय पर बाहर निकल जाते हैं। तो पर्सनल बातचीत का समय सभी को नहीं मिल पा रहा है। जिससे आप पर्सनल कनेक्ट कर सकें।
जैसे ही आप लीडर बनते हो, या सुपरवाइजर बनते हो या मैनेजर बनते हो आपके ऊपर न सिर्फ अपनी बल्कि आपकी टीम की भी जिम्मेदारी होती है। टीम का फेलियर भी आपका होता है और सक्सेस भी। एक लीडर को इसे ऐसे भी समझना चाहिए कि अगर सक्सेस हुए तो आपकी टीम सक्सेस हुई अगर फेलियर हुए तो आप फेल हुए। जैसे कि आप नए लीडर बनते हैं तो जो टीम होती है वो आपको लीडर के रूप में स्वीकार नहीं करती है। उस टीम में अनुभव और उम्र में आपसे कई लोग सीनियर भी होते हैं। वो कभी आपको एक लीडर के रूप में स्वीकार नहीं कर पाते। ऐसे में आपका ये दायित्व होता है कि आप सबसे पहले ऐसे लोगों का विश्वास दृढ़ करें। अगर आप उनको कांफिडेंट कर पाए तो वो आपके साथ रहेंगे। उन्हें आपके साथ सुरक्षा का एहसास होगा तो आपके साथ चलेंगे। लोगों का विश्वास जीतने के लिए समय लगता है ये आप अपने कार्यों से, अपने तौर तरीकों से जीत सकते हैं।