लक्ष्य छोटा रखें
हमें पहले से मानकर चलना चाहिए कि शुरुआती उत्साह समय के साथ कम होगा, और यह बिल्कुल सामान्य है। इसलिए काम की योजना ऐसी होनी चाहिए, जो कम प्रेरणा या बहुत व्यस्त दिनों में भी टूटे नहीं। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि हम सबसे छोटा संभव कार्य तय करें, जैसे रोज सिर्फ 10 मिनट का काम। इतना छोटा लक्ष्य दिमाग पर बोझ नहीं डालता और उसे टालना मुश्किल होता है। कई बार यही 10 मिनट धीरे-धीरे ज्यादा समय में बदल जाते हैं, लेकिन असली जीत यह है कि हम रुकें नहीं और आगे बढ़ते रहें।
मन से चुनें अपना लक्ष्य
हमें ऐसे लक्ष्य नहीं चुनने चाहिए, जो सिर्फ दूसरों की उम्मीदों या दबाव की वजह से बनाए गए हों। जब लक्ष्य हमें खुद से जुड़े हुए और महत्वपूर्ण लगते हैं, तभी हम उन्हें लंबे समय तक निभा पाते हैं। अपने मन से चुने गए लक्ष्य हमें ज्यादा प्रेरित रखते हैं, क्योंकि उनमें हमारी रुचि और वजह छिपी होती है। ऐसे लक्ष्य न सिर्फ आगे बढ़ने की ताकत देते हैं, बल्कि मुश्किल समय में भी टिके रहने में मदद करते हैं।
आसान तरीका तलाशें
काम और लक्ष्यों को याददाश्त के भरोसे छोड़ने के बजाय किसी आसान सिस्टम की मदद लेनी चाहिए। जीटीडी, ओकेआर और हैबिट स्टैकिंग काम और लक्ष्यों को आसान बनाने के तरीके हैं। जीटीडी में सारे काम लिखकर, उन्हें छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, ताकि कुछ रह न जाए। ओकेआर में पहले एक बड़ा लक्ष्य तय किया जाता है और
फिर उसे पूरा करने के लिए छोटे लक्ष्य बनाए जाते हैं। हैबिट स्टैकिंग में नई आदत को रोज की किसी पुरानी आदत से जोड़ दिया जाता है, जिससे उसे अपनाना आसान हो जाता है। ये तरीके मिलकर काम को व्यवस्थित रखते हैं और निरंतर प्रगति में मदद करते हैं।