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Success Mindset: सिर्फ सपने नहीं, सफलता के लिए लगातार मेहनत है जरूरी; निरंतर प्रयास से ही मिलती है कामयाबी

Sat, 31 Jan 2026 05:10 PM IST
शाहीन परवीन गयानी गुनासेकेरा, पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलो सिडनी यूनिवर्सिटी

सार

Clear Goals: सफल होने के लिए सिर्फ शुरुआत करना ही काफी नहीं होता। असली सफलता तब मिलती है जब हम छोटे और साफ लक्ष्य बनाकर रोज लगातार मेहनत करते रहते हैं। धीरे-धीरे किया गया यही निरंतर प्रयास हमें आगे बढ़ाता है और मंजिल तक पहुंचाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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Consistent Effort: काम की शुरुआत में अक्सर लोगों में नई ऊर्जा और बड़े बदलाव की उम्मीद दिखाई देती है। सभी सोचते हैं कि अब सब कुछ अलग होगा, लेकिन कुछ समय बाद वही उत्साह कम होने लगता है। हम इसे अपनी इच्छाशक्ति या अनुशासन की कमी मान लेते हैं, जबकि मनोविज्ञान बताता है कि नई शुरुआत हमें काम शुरू करने में तो मदद करती है, पर लंबे समय तक टिके रहने में नहीं।

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जब लक्ष्य बहुत बड़े, अस्पष्ट या अव्यावहारिक होते हैं, तो हम जल्दी थक जाते हैं। टिकाऊ बदलाव के लिए जरूरी है कि छोटे, स्पष्ट और अव्यावहारिक लक्ष्य बनाए जाएं और उन पर रोज थोड़ा-थोड़ा काम किया जाए।

लक्ष्य छोटा रखें

हमें पहले से मानकर चलना चाहिए कि शुरुआती उत्साह समय के साथ कम होगा, और यह बिल्कुल सामान्य है। इसलिए काम की योजना ऐसी होनी चाहिए, जो कम प्रेरणा या बहुत व्यस्त दिनों में भी टूटे नहीं। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि हम सबसे छोटा संभव कार्य तय करें, जैसे रोज सिर्फ 10 मिनट का काम। इतना छोटा लक्ष्य दिमाग पर बोझ नहीं डालता और उसे टालना मुश्किल होता है। कई बार यही 10 मिनट धीरे-धीरे ज्यादा समय में बदल जाते हैं, लेकिन असली जीत यह है कि हम रुकें नहीं और आगे बढ़ते रहें।

मन से चुनें अपना लक्ष्य

हमें ऐसे लक्ष्य नहीं चुनने चाहिए, जो सिर्फ दूसरों की उम्मीदों या दबाव की वजह से बनाए गए हों। जब लक्ष्य हमें खुद से जुड़े हुए और महत्वपूर्ण लगते हैं, तभी हम उन्हें लंबे समय तक निभा पाते हैं। अपने मन से चुने गए लक्ष्य हमें ज्यादा प्रेरित रखते हैं, क्योंकि उनमें हमारी रुचि और वजह छिपी होती है। ऐसे लक्ष्य न सिर्फ आगे बढ़ने की ताकत देते हैं, बल्कि मुश्किल समय में भी टिके रहने में मदद करते हैं।

आसान तरीका तलाशें

काम और लक्ष्यों को याददाश्त के भरोसे छोड़ने के बजाय किसी आसान सिस्टम की मदद लेनी चाहिए। जीटीडी, ओकेआर और हैबिट स्टैकिंग काम और लक्ष्यों को आसान बनाने के तरीके हैं। जीटीडी में सारे काम लिखकर, उन्हें छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, ताकि कुछ रह न जाए। ओकेआर में पहले एक बड़ा लक्ष्य तय किया जाता है और

फिर उसे पूरा करने के लिए छोटे लक्ष्य बनाए जाते हैं। हैबिट स्टैकिंग में नई आदत को रोज की किसी पुरानी आदत से जोड़ दिया जाता है, जिससे उसे अपनाना आसान हो जाता है। ये तरीके मिलकर काम को व्यवस्थित रखते हैं और निरंतर प्रगति में मदद करते हैं। 
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जवाबदेही सुनिश्चित करें 

लक्ष्यों को किसी साथी या सहकर्मी के साथ साझा करने से हमें अपनी जिम्मेदारी का एहसास होता है। जब कोई हमारी प्रगति पर नजर रखता है या हमारी उपलब्धियों और मुश्किलों में भागीदार बनता है, तो हमें अपने लक्ष्यों को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती रहती है। यह न केवल हमारी लक्ष्य पर टिके रहने में मदद करता है, बल्कि हमारी मेहनत और प्रयासों को और अधिक संगठित और केंद्रित भी बनाता है।

-द कन्वर्सेशन
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