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College Life: कॉलेज में नए हैं तो घबराना नहीं, सक्रिय रहकर सवाल पूछें और हर मौके से कुछ नया सीखें

Wed, 08 Jul 2026 10:26 AM IST
Shahin Praveen लियो एम लैम्बर्ट प्रोफेसर, एलन यूनिवर्सिटी

सार

Campus life: कॉलेज का पहला साल हर छात्र के लिए नए अनुभवों, चुनौतियों और अवसरों से भरा होता है। शुरुआत में घबराहट होना सामान्य है, लेकिन सक्रिय रहकर, सवाल पूछकर और सीखने की इच्छा बनाए रखकर आप इस सफर को आसान और सफल बना सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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College Life: कॉलेज जीवन की शुरुआत हर छात्र के लिए एक नया और महत्वपूर्ण अनुभव होती है। यह वह समय होता है, जब व्यक्ति अपने परिचित वातावरण से निकलकर एक बिल्कुल नए माहौल में कदम रखता है, जहां नए लोग, नई सोच, नई पढ़ाई की शैली और नई जिम्मेदारियां उसका इंतजार कर रही होती हैं। ऐसे में, उत्साह के साथ-साथ थोड़ी घबराहट और अनिश्चितता महसूस होना बिल्कुल स्वाभाविक है। इसी चरण में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि छात्र स्वयं पर भरोसा रखें और खुद को धीरे-धीरे इस नए वातावरण में ढालें।

शिक्षकों से करते रहें बात

विद्यार्थी और शिक्षक के बीच अच्छा संवाद बेहतर सीखने की आधारशिला है। नए छात्रों को प्रोफेसरों से बात करने में संकोच नहीं करना चाहिए। कक्षा से पहले या बाद में परिचय देना, ऑफिस आवर में मिलना या ऑनलाइन मार्गदर्शन लेना अच्छे संबंध बनाने की शुरुआत है। ऐसे संबंध विषय की समझ बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य में शोध, सिफारिश पत्र और कॅरिअर मार्गदर्शन में भी सहायक होते हैं।

नए दोस्त बनाएं

कॉलेज का पहला वर्ष नए मित्र बनाने और मजबूत संबंध विकसित करने का सबसे अच्छा अवसर होता है। कक्षा के बाद कुछ समय सहपाठियों से बातचीत करें, नोट्स साझा करें और असाइनमेंट या विषय से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा करें। इससे आप एक-दूसरे से सीखते हैं और पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। समूह में अध्ययन करने से विषय की समझ गहरी होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और परीक्षा का तनाव कम होता है। अच्छे मित्र हर चुनौती में सहयोग करते हैं और कॉलेज जीवन को अधिक सहज बना देते हैं।

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अनुभव एकत्रित करें

कॉलेज केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। 'रिलेशनशिप एक्सीलरेटर' वे अनुभव होते हैं, जो कक्षा में सीखी गई बातों को वास्तविक जीवन से जोड़ते हैं। इनमें इंटर्नशिप, स्नातक शोध, लेखन-प्रधान सेमिनार, विदेश अध्ययन कार्यक्रम और कैंपस प्लेसमेंट जैसी गतिविधियां शामिल हैं। ऐसे अनुभव छात्रों को व्यावहारिक कौशल सिखाते हैं और उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक ले जाते हैं। 

उदाहरण के लिए कैंपस में किसी नौकरी के दौरान आपका पर्यवेक्षक आपकी क्षमताओं को पहचानकर आपको नई जिम्मेदारियां दे सकता है। कई बार दूसरे लोग हममें वे संभावनाएं देख लेते हैं, जिन्हें हम स्वयं नहीं पहचान पाते। ये अवसर व्यक्तित्व को निखारते हैं और भविष्य के लिए बेहतर रूप से तैयार करते हैं।
  • इस समय सबसे जरूरी है स्वयं पर भरोसा रखना और आत्मविश्वास बनाए रखना।
  • सकारात्मक सोच से शुरुआती चुनौतियां आसान हो जाती हैं।
  • प्रोफेसरों, स्टाफ और सहपाठियों के साथ अच्छे संबंध भविष्य में मदद करते हैं।

खुद से जुड़ें

नए छात्रों को अक्सर 'इम्पोस्टर सिंड्रोम' का अनुभव होता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सक्षम और योग्य होने के बावजूद व्यक्ति स्वयं को कमतर समझने लगता है। यह भावना सामान्य है और समय के साथ दूर हो सकती है। सबसे पहले, अपनी पहचान और अपने गुणों को याद रखें। आपने यहां तक पहुंचने के लिए मेहनत की है, इसलिए स्वयं पर विश्वास रखें। यदि किसी विषय में कठिनाई हो या मन में संदेह उत्पन्न हो, तो प्रोफेसर या मित्र से खुलकर बात करें। सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता का संकेत है।
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