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Safalta Talks : हमेशा वर्टिकल ग्रोथ वाला बिजनेस करना चाहिये शुरू : विजय कुमार

Fri, 07 Jun 2024 01:28 PM IST
Pushpendra Mishra Media Solution Initiative

सार

विषय : उद्यमिता की यात्रा

वक्ता : विजय कुमार अग्रवाल, सीईओ एवं फाउंडर मकून्स स्कूल समूह

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Journey of enterpreneurship - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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आज की युवा पीढ़ी जो कहीं नौकरी करती है तो वह जॉब को जॉब के तरीके से न करके उसकी ऑनरशिप लेकर करें। मैंने 14-15 साल तक जितनी भी नौकरियां की हैं उनमें पहली नौकरी से लेकर आखिरी जॉब तक मैंने एम्प्लाई बनके नहीं एक उद्यमी बनकर ही काम किया है। ये बात सफलता.कॉम द्वारा उद्यमिता की यात्रा विषय पर आयोजित किये गए मास्टर क्लास सेशन में मकून्स स्कूल समूह के सीईओ व फाउंडर विजय कुमार अग्रवाल ने कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने 16 साल के पेपर इंडस्ट्री कॅरिअर में जिन 5 असाइनमेंट्स पर काम किया वो पांचो असाइनमेंट्स जीरो से शुरू हुए थे। प्रोफेशनल कॅरिअर में जब मैंने जीरो से काम शुरू कर कंपनी के बड़े प्रोजेक्ट को खड़ा किया। तभी मैंने फैसला लिया कि जब मैं दूसरे के लिए काम कर सकता हूं तो क्यूं न खुद का काम शुरू करूं। इसमें मुझे मेरी पत्नी का सहारा मिला। जोकि पहले से ही एजुकेशन प्रोफेशनल थीं।

ये भी सीखें 

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प्रोफेशनल डिजिटल मार्केटिंग 
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एडवांस डिजिटल मार्केटिंग
 

ब्रांड का नाम छोटा रखें

उन्होंने उद्यम शुरू करने की सोच रहे युवाओं को कहा कि आप जब भी अपने ब्रांड का नाम रखें तो ऐसा रखें जिसे पहली बार में रिकॉल न किया जा सके। जैसे उन्होंने अपने ब्रांड मकून्स का उदाहरण दिया। जिसका आमतौर पर सभी लोगों को अर्थ नहीं मालुम है। सफेद भालू के बच्चे को मकून्स कहते हैं। विजय ने कहा कि हमें कभी ब्रांड का लंबा नाम नहीं रखना चाहिए। नाम हमेशा कठिन होना चाहिए। एक शब्द का होना चाहिए। क्योंकि सिंगल नाम हमेशा लोगों को आसानी से याद हो जाता है।

 

उद्योग या कंपनी में समर्पित टीम का होना जरूरी

विजय ने जिंदगी में उद्योग स्थापित करते समय आयी चुनौतियों पर कहा कि कोई भी काम तभी सफल होता है जब उसके पीछे समर्पित टीम काम करती है। बिना समर्पित टीम के कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे बच्चे को ही अगर अच्छे मार्क्स लाने हैं तो बच्चा तो मेहनत करता ही है उसका टीचर भी उसके साथ मेहनत करता है। उसके मां बाप भी घर में बच्चे को वो वातावरण देते हैं तब जाकर कहीं वो बच्चा अच्छे मार्क्स लेकर आ पाता है।

 

बिजनेस के लिए रिस्क लेने की क्षमता का होना जरूरी
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फंडिंग पर उन्होंने कहा कि बिजनेस के लिए फंडिंग बहुत जरूरी होती है। मैंने मकून्स स्कूल्स का बिजनेस खुद की फंडिंग से शुरू किया था। मैंने पहले दिन से ही अपने ऑफिस का वातावरण बहुत प्रोफेशनल रखा था। बड़े निर्णय कैसे लें जवाब में विजय ने कहा कि जब भी आप कोई बिजनेस शुरू करने जाते हो तो बड़े फैसले लेने की योग्यता आप में होनी चाहिए। इसके अलावा जब भी हम कोई बिजनेस करें तो हमें ये सोचकर बिजनेस का क्षेत्र चुनना चाहिए कि वह एक्सपेंडेबल हो। ऐसा न हो कि आपने कोई दुकान खोली और आप उसे एक दायरे से आगे लेकर जा ही न पाएं। इसके अलावा आज ज्यादातर बिजनेस क्रेडिट के कारण डूबते हैं। हमें हमेशा ऐसे बिजनेस को चुनना चाहिए जिसमें कम से कम उधार हो। साथ ही हमें अपने बिजनेस में ग्रोथ को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।

 

हमेशा वर्टिकल ग्रोथ वाला बिजनेस ही स्टार्ट करें
 

एक ग्रोथ ये हुई कि एक स्कूल आपने खोला और उसी तरह के 100 स्कूल खोल दिए। ये हॉरिजोंटल ग्रोथ हो गई। वहीं अगर हम प्री प्राइमरी से निकलकर प्राइमरी, जूनियर, सीनियर सेकेंडरी, हायर सेकेंडरी और डिग्री कॉलेज तक जाते हैं तो ये इसकी वर्टिकल ग्रोथ हो गई। तो हमें हमेशा बिजनेस वर्टिकल ग्रोथ हो सके ऐसा खोलना चाहिए। विजय कुमार ने कहा कि मेरे लिये सबसे बड़ा निर्णय था कि एक 50-60 हजार रुपये की नौकरी छोड़कर जीरो से अपना बिजनेस शुरू करना।

 

मेंटर महत्वपूर्ण लेकिन जीवन के फैसले खुद लेना सीखें  

किसी भी बिजनेस को स्टार्ट करते समय और बिजनेस के दौरान अगर आपका कोई मेंटर है तो उसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी बिजनेस को शुरू करते समय लोग तरह तरह के सवाल करते हैं वो लोगों का प्यार और आपके प्रति चिंता हो सकती है। लेकिन अंतिम निर्णय आपको ही लेना होता है। क्योंकि जीवन में कहीं न कहीं युवाओं के साथ ऐसा जरूर होगा कि उन्हें लाइफ के डिसीजन खुद लेने पड़ेंगे। उन फैसलों से जो उतार चढ़ाव आएंगे उसके लिए आप ही जिम्मेदार होंगे।

 

एक बार फैसला लेकर पीछे न हटें

उन फैसलों का एक स्वाट एनालिसिस आप जरूर कर लें। कि जो भी निर्णय लेना चाहते हैं तो ये जरूर देखें कि आपकी स्ट्रेंथ क्या है, आपकी कमजोरी क्या है आपकी क्रेडिट लिमिट क्या है और आपके पास अपॉरचुनिटीज क्या हैं। साथ ही युवाओं को अपने कार्य में निरंतरता जरूर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही आप फैसला लेने में एक साल लगाएं लेकिन जब आप कोई फैसला लें तो उसे हासिल करने में पूरी जी जान लगा दें। फिर पीछे नहीं हटना है।

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