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SAFALTA Talk Master Class : पूरी तरह से एआई जनरेटिव कंटेंट ब्रांड्स यूज नहीं कर पाएंगे : तन्मय

Wed, 03 Jan 2024 09:32 PM IST
Pushpendra Mishra Media Solution Initiative

सार

Master Class Session Topic: Content Marketing In the Age of Generative, Guest - Tanmay Guha Roy, CMO, FCI.  

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मास्टर क्लास सेशन Content Marketing In the Age of Generative AI - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सफलता.कॉम द्वारा कंटेंट मार्केटिंग इन द एज ऑफ जनरेटिव एआई विषय पर आयोजित किये गए मास्टर क्लास सेशन में एफसीआई के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर तन्मय गुहा रॉय ने कहा मैं एक लिटरेचर का स्टूडेंट रहा हूं इसलिये कंटेंट के साथ लगाव शुरू से बना रहा। साथ ही लोग क्या कंटेंट पढ़ना चाहते हैं क्या कंज्यूम करते हैं पर भी मेरा ध्यान रहता था। जिसे आज हम कंटेंट के रूप में देखते हैं पढ़ते हैं 2002 में कंटेंट का ये स्वरूप नहीं था। उस समय कंटेंट शब्द भी कम ही इस्तेमाल होता था। तब प्रचार के मुख्य माध्यमों में टीवी रेडियो और प्रिंट थे। क्योंकि उस समय इंटरनेट की उपलब्धता सबसे लिये सरल नहीं थी। साइबर कैफे में जाकर 60 रुपये घंटे आपको चार्ज देना होता था इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए। उस समय वीडियो स्ट्रीमिंग भी बहुत कम होती थी। डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर उस समय बहुत कुछ नहीं था क्योंकि 1998 में गूगल ने सर्च इंजन लांच किया और 2002 के आसपास ही गूगल एडवर्ड लांच किया गया।

2002 के आसपास एक वेबसाइट बनाना था बड़ी बात 

2002 के आसपास डिजिटल में एक वेबसाइट बनाना ही बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। फ्लॉपी खत्म होकर सीडी या कॉम्पैक्ट डिस्क आ गया। उसमें पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन वर्न करके सीडी में एग्जिबिशन आदि में बांटा जाता था। उस समय वही डिजिटल मार्केटिंग होती थी। मुझे तभी समय आ गया कि मार्केटिंग सेक्टर में मार्केटिंग कम्यूनिकेशन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। और कंटेंट मार्केटिंग क्षेत्र में किंग है। उन्होंने कहा कि जैसे ई बुक के लिये, टीवी के लिए, प्रिंट के लिए कंटेंट बनाने के अलग अलग तरीके हैं उसी तरह इंटरनेट के कंटेंट के लिए भी तरीके अलग थे। कंटेंट और कम्प्युनिकेशन के साइकोलॉजिकल पार्ट पर मैं शुरू से काम कर रहा था।

एआई जैसी दिक्कत गूगल न्यूज के समय भी आयी थी

एआई को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नाम गलत दिया गया है के सवाल पर तन्मय ने कहा कि नोआन चॉम्स्की की बात को अगर देखें तो गूगल के जमाने से टेक्नोलॉजी में ये सब होता रहा है। गूगल न्यूज के समय में भी ये हुआ था कि सारी न्यूज गूगल इकट्ठी करके लोगों को सजेस्ट करता था। यानी वो ये तय करता था कि लोग क्या पढ़ें। एआई के साथ भी यही है ये भी कंटेंट को इकट्ठा करता है। कोई भी एआई सिस्टम बिना ट्रेनिंग के काम नहीं कर सकता। ट्रेनिंग आदमी के द्वारा ही उसे दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान ही बहुत सारा डेटा एआई जमा कर लेता है।

एकरूपता होने से ब्रांड की आइडेंटिटी और अथेंसिटी हो जाएगी खत्म 

जनरेटिव एआई के कंटेंट की अधिकता से कैसे निपट सकते हैं पर तन्मय रॉय ने कहा कि आज जो लोग फेस कर रहे हैं कि सभी ब्रांड एक जैसे एआई कंटेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं ये चीज गूगल ने भी फेस की थी। लोग सर्च में अपना कंटेंट लाने के लिए एक जैसी चीजों का इस्तेमाल करने लगे थे। जिसके बाद अच्छे कंटेंट को वैल्यू देने के लिए गूगल अब लगातार अंतराल पर अपने एसईओ एल्गोरिद्म बदलने लगा है। लेकिन अब एआई के साथ ये एक बड़ी चुनौती है कि क्योंकि हर एक ब्रांड की अपनी एक अलग पहचान और ब्रांड स्टोरी होती है। जिसे मैनेज करना जरूरी होता है। इसीलिए ये तय है कि पूरी तरह से एआई जनरेटिव कंटेंट ब्रांड्स यूज नहीं कर पाएंगे। क्योंकि एकरूपता होने पर ब्रांड्स की आईडेंटिटी और अथेंटिसिटी खत्म हो जाएगी।

सन 2000 के बाद इन 3 चरणों में बदला इंटरनेट 

पिछले 20 सालों में कंटेंट मार्केटिंग में कैसे बदलाव हुआ है इस सवाल पर तन्मय ने कहा कि कंटेंट मार्केटिंग पोस्ट इंटरनेट में हुआ है। पहले टीवी रेडियो या प्रिंट में ही हम एड दे सकते थे। इंटरनेट के आने के बाद क्लाउडबेस्ड टूल आ गया। अब डिजिटल में एड का पैसा प्रिंट और टीवी एड से काफी कम लगता है। जब इंटरनेट शुरू हुआ तो उस जमाने को हम 1.0 मान लेते हैं। इसमें जो आप पब्लिस करते थे उसमें कोई बदलाव संभव नहीं हो पाता था, और न ही उसके नीचे कोई कमेंट कर सकता था। लेकिन 2006 के आस पास इंटरनेट में बदलाव हुए और 2.0 की शुरूआत हुई। इसमें इंटरेक्टिविटी आयी। जो भी लोग आपके लिखे कंटेंट को पढ़ सकते थे वो उसपर कमेंट करने लगे। पहले एक लिंक पर क्लिक करने पर दूसरा पेज खुलता था। फिर वेब 2.0 आया। अब क्या है लिंक के नीचे ही बिना पेज बदले बिना आप पढ़ सकते हैं। अब आप कंटेंट शेयर भी कर सकते हैं। एक ही प्लेटफॉर्म पर कंटेंट पढ़ सकते हैं। बैंडविथ बढ़ी, स्ट्रीमिंग स्मूथ हुई। ऑडियो वीडियो मिलकर ऑड़ियो विजुएल बने। पहले एक फोटो को डाउनलोड करने में कई मिनट लगते थे। लेकिन अब सेकेंड्स में हो जाता है। आज ब्रांड कंटेंट पब्लिश करने के बाद एडिट कर सकते हैं। साथ ही एक ही कंटेंट को मल्टिपल फॉर्मेट में आप बदल सकते हैं। फिर ब्लॉग और सोशल मीडिया बगैरह आने शुरू हुए। अब मार्केटिंग के लिये वेबसाइट ब्लॉग के अलावा फेसबुक- इंस्टा रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स, गूगल एड जैसे तमाम प्लेटफॉर्म आ गये।

बड़े शहरों की तरह अब छोटे शहरों में भी आसानी से डिजिटल मार्केटिंग कर रहे प्रोफेशनल

देहात क्षेत्र में कंटेंट मार्केटिंग में मार्केटर्स को क्या परेशानी आती हैं पर तन्मय ने कहा कि कोरोना के समय मैंने 2 साल तक कोई दिक्कत पेश नहीं आयी। छोटे शहरों या देहात के इंटरनेट और शहर में इंटरनेट कंजम्प्शन में आज के समय में कोई खास अंदर नहीं है। मोबाइल इंटरनेट के सस्ते होने से देहात और शहर के मार्केटिंग में कोई खास अंतर नहीं बचा। आज एआई एक्सेस, गूगल वार्ड चैट जीपीटी का इस्तेमाल हर मार्केटर कर रहा है। छोटे शहरों में युवाओं को इंटरनेट पर हर जानकारी उपलब्ध है। लोगों को दुनियां में क्या चल रहा है घर बैठे नेट के जरिये जान सकते हैं। छोटे शहर से होने के कारण युवा अपनी सोच छोटी न रखें। ये सोचें कि मैं किसी से कम नहीं हूं। गूगल एड या फेसबुक एड में केवल आपकी ऑडियंस साइज बदलती है। अगर आप मल्टिपल चैनल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आज किसी भी जगह पर डिजिटल मार्केटिंग कर सकते हैं। क्योंकि 10 हजार रुपये इंटरनेट मार्केटिंग पर खर्च करके जो रिजल्ट आप दिल्ली में ले सकते हैं वही रिजल्ट आपको मेरठ में भी मिल सकते हैं।

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