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रुहेलखंड विवि देगा एग्रीकल्चर में पीएचडी

Fri, 12 Dec 2014 10:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/धामपुर (बिजनौर) /बरेली।
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एमजेपी रूहेलखंड विवि के कृषि संकाय के छात्रों को पीएचडी की डिग्री मिलने का सपना अब जल्द ही साकार होगा। विवि ने प्रोफेसरों से कोर्स वर्क तलब कर गाइडों की समिति को हरी झंडी दे दी है। अभी तक यूनिवर्सिटी कृषि विषयों में पीएचडी की उपाधि नहीं देती थी। कृषि में बीएससी/एमएससी करने के बाद छात्र-छात्राओं को दूसरी यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने जाना पड़ता था।
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रूहेलखंड विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के डीन डॉ. राजेश चौहान ने बताया कि उनके प्रयास के बाद विवि ने पीएचडी की उपाधि देने को हामी भरी है। परंतु यह तभी सफल होगा, जब पीएचडी कराने के इच्छुक शिक्षक सुपरवाइजर बनना चाहते हैं, वह अपनी सीटों का ब्यौरा उपलब्ध करा दें। इसके बाद कोर्स वर्क तैयार होगा। यूनिवर्सिटी के इकलौते कृषि कॉलेज आरएसएम के प्रोफेसरों पर ही इसका दारोमदार आ गया है, क्योंकि आरएसएम के अलावा अन्य तीन कृषि कॉलेज जिला मुरादाबाद के रतुपुरा महाविद्यालय, चांदपुर बिजनौर के तिगड़ी और जिला पीलीभीत के बीसलपुर महाविद्यालय सेल्फ फाइनेंस हैं। उनमें अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि भी केवल आरएसएम कॉलेज के प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में करनी होगी।

इन विषयों में मिलेगी पीएचडी
डा. राजेश चौहान का कहना है कि एग्रोनॉमी, कृषि अर्थशास्त्र, हार्टीकल्चर, कृषि वनस्पति, मृदा रसायन, कृषि जीव रसायन, मृदा संरक्षण, कृषि जंतु विज्ञान, पशुपालन, पैथोलॉजी, पादप रोग विज्ञान, कृषि विस्तार शिक्षा आदि कई कृषि विषयों में पीएचडी की उपाधि मिल सकेगी।
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साइंस में पीएचडी के लिए काउंसिलिंग का आज आखिरी मौका
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में साइंस में पीएचडी के लिए बची सीटों के लिए शुक्रवार को काउंसिलिंग होगी। इसके अलावा शिक्षाशास्त्र की काउंसिलिंग 14 दिसंबर को होगी।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पीएचडी की काउंसिलिंग जल्द पूरी कर कोर्स वर्क शुरू किया जाना है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य यह है कि जिन विद्यार्थियों का जेआरएफ और नेट की वैलिडिटी खत्म हो रही हो, उन्हें समय से पीएचडी का मौका मिले।

सुपरवाइजर की सीट के ब्योरे के बाद तैयार होगा कोर्स वर्क
सुपरवाइजर और विद्यार्थियों के आवेदन पत्र की संख्या के बाद पीएचडी शुरू करने पर विचार बनेगा। अगर विद्यार्थी दिलचस्पी लेंगे तो फिर जल्दी ही शुरू हो जाएगी।
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- प्रो. वीपी सिंह, पीएचडी कोऑर्डीनेटर    
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