इंजीनियरिंग छात्रों की खराब परफॉरमेंस को देखते हुए ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकशन (AICTE) ने बड़ा फैसला लिया है। इसके मुताबिक अब छात्रों को इंजीनियरिंग की डिग्री तभी दी जाएगी, जब वह स्किल (कौशल) टेस्ट पास कर लेगा। यह टेस्ट आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई करने वाले छात्रों को देना होगा। यदि कोई स्टूडेंट इस टेस्ट में फेल होता है तो उसे दोबारा टेस्ट देना होगा। यह सिलसिला तब तक चलेगा, जब तक वह टेस्ट पास नहीं कर लेता।
एआईसीटीई के एक अधिकारी ने बताया कि इस प्रस्ताव को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह व्यवस्था सत्र 2017-18 से लागू हो जाएगी। जून 2017 तक सभी यूनिवर्सिटी एवं स्वायत्त कॉलेजों को आदेश भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि टेस्ट में संबंधित कॉलेज के अलावा बाहर के भी शिक्षक शामिल होंगे।
अभी क्या है प्रक्रिया
बता दें इंजीनियरिंग की पढ़ाई चार साल की होती है। इसमें आठ सेमेस्टर होते हैं। पूरी पढ़ाई के दौरान सिलेबस से ही सवाल पूछे जाते हैं। सभी सेमेस्टर पास करने के बाद अभ्यर्थी को डिग्री दे दी जाती है।