मध्य प्रदेश सरकार ने अपने एक फैसले में नए अकादमिक सत्र से इंजीनियरिंग को भी हिंदी में पढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद जहां एक तरफ छात्र और शिक्षक कुछ टेक्निकल शब्दों जैसे सरफेस टेंशन और ओसमोसिस की हिंदी मीनिंग तलाश रहे हैं वहीं दूसरी तरफ हिंदी में कोई भी टेक बुक उपलब्ध नहीं है।
फैसले को लेकर कंफर्मेशन देते हुए एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि छात्रों को एडमिशन के वक्त हिंदी या अंग्रेजी में से एक चुनने की आजादी होगी। यह फैसला मंगलवार को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एक मीटिंग के दौरान लिया गया।
कुछ सीनियर शिक्षाविदों ने इस फैसले को क्रिटिसाइज किया है और कहा कि यह कोई प्रगति का कदम नहीं है और न ही इससे इंजीनियरिंग के छात्रों को नौकरी पाने में कुछ फायदा होगा।
एक प्रोफेसर ने कहा कि, "इंजीनियरिंग को हिंदी में पढ़ाने से कोई फायदा नही है जबकि हिंदी में एक भी किताब उपलब्ध नही है। आप कैसे टेक्निकल टर्म्स को ट्रांसलेट करेंगे।"
इस पर तकनीकि शिक्षा मंत्री का कहना था कि आपको टेक्निकल टर्म्स को ट्रांसलेट करने की कोई जरूरत नही है। आप उनको वैसे का वैसा हिंदी में लिखिए। यह फैसला अंग्रेजी में कमजोर छात्रों को ध्यान में रख कर लिया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक अभी तक यूनिवर्सिटी ने हिंदी के लिए अलग क्लास की कोई योजना नहीं बनाई है। ऐसा मान के चला जा रहा है कि कॉलेजों में शिक्षक हिंदी में ही पढ़ाते हैं।