नए फंड से स्टार्टअप्स को मिल रहा बड़ा सहारा
सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए सुधारों और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि देश का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। 2019 में जहां कुछ ही स्टार्टअप थे, वहीं 2026 की शुरुआत तक इनकी संख्या 400 से ज्यादा हो गई है।
अधिकारी ने कहा, "ये स्टार्टअप अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी बुनियादी ढांचे, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं।"
अधिकारी ने बताया कि 500 करोड़ रुपये का एक फंड बनाया गया है। इसका इस्तेमाल नई तकनीक और नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, ताकि शुरुआती आइडिया को आसानी से उपयोगी और बाजार में बिकने वाले उत्पादों में बदला जा सके।
अधिकारी ने आगे कहा, "कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं, जिसके तहत 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 प्रतिभागियों को प्रमाणित किया गया है।"