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JMI: भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करने की पहल, हिंदी सामाजिक विज्ञान शब्दावली पर काम कर रहा जामिया

Fri, 16 Jan 2026 12:02 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Jamia Millia Islamia: जामिया मिल्लिया इस्लामिया भारतीय ज्ञान प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल कर रहा है। विश्वविद्यालय हिंदी सामाजिक विज्ञान शब्दावली पर काम करते हुए ज्ञान को अधिक सुलभ और समृद्ध बनाने का प्रयास कर रहा है।
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Jami Millia Islamia, JMI - फोटो : X (@jmiu_official)
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विस्तार
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Hindi Terminology: जामिया मिलिया इस्लामिया ने गुरुवार को उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि उसने अंग्रेजी से हिंदी में सामाजिक विज्ञान की शिक्षार्थी शब्दावली विकसित करने के लिए पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन किया।

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समापन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों को "औपनिवेशिक मानसिकता" से दूर हटना चाहिए और भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) को शिक्षा के केंद्र में रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, "आधुनिकता की झूठी भावना ने हमारे दिमाग पर जहरीला प्रभाव डाला है। हमें अपनी ज्ञान परंपराओं को प्राथमिकता देकर इसे ठीक करने की जरूरत है।

एक बयान में बताया गया कि यह कार्यशाला शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT) ने जामिया के राजनीति विज्ञान विभाग के साथ मिलकर आयोजित की थी। इसका उद्देश्य हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में सामाजिक विज्ञान की शब्दावली को मजबूत करना था।

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भारतीय भाषाओं में सार्थक और सटीक अनुवाद पर जोर

इस पहल में देशभर के विद्वानों ने सामाजिक विज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण शब्दों का ऐसा सरल और उपयुक्त अनुवाद किया, जो भारतीय इतिहास, भूगोल और संस्कृति को सही तरह से दर्शाए। कुलपति ने कहा कि अनुवाद केवल शब्द बदलने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अलग-अलग भारतीय भाषाओं में काम करते समय उनके अर्थ और संदर्भ को भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

अनुवादक और भाषाविज्ञानी के रूप में अपने अनुभव का हवाला देते हुए, उन्होंने टीम से शाब्दिक अनुवाद की सीमाओं के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया और शब्दावली तैयार करने वाले 13 सदस्यीय विशेषज्ञ समूह की प्रशंसा की।

कार्यशाला के समन्वयक प्रोफेसर नावेद जमाल ने इस प्रयास की जड़ें महात्मा गांधी के हिंदी और हिंदुस्तानी के प्रचार और भारतेंदु हरिश्चंद्र के अपनी भाषा में बौद्धिक विकास के आह्वान में बताईं। उन्होंने भौतिक विज्ञानी और शिक्षाविद प्रोफेसर डी.एस. कोठारी के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने एक समय सीएसटीटी की अध्यक्षता की थी।
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