भारतीय भाषाओं में सार्थक और सटीक अनुवाद पर जोर
इस पहल में देशभर के विद्वानों ने सामाजिक विज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण शब्दों का ऐसा सरल और उपयुक्त अनुवाद किया, जो भारतीय इतिहास, भूगोल और संस्कृति को सही तरह से दर्शाए। कुलपति ने कहा कि अनुवाद केवल शब्द बदलने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अलग-अलग भारतीय भाषाओं में काम करते समय उनके अर्थ और संदर्भ को भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।
अनुवादक और भाषाविज्ञानी के रूप में अपने अनुभव का हवाला देते हुए, उन्होंने टीम से शाब्दिक अनुवाद की सीमाओं के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया और शब्दावली तैयार करने वाले 13 सदस्यीय विशेषज्ञ समूह की प्रशंसा की।
कार्यशाला के समन्वयक प्रोफेसर नावेद जमाल ने इस प्रयास की जड़ें महात्मा गांधी के हिंदी और हिंदुस्तानी के प्रचार और भारतेंदु हरिश्चंद्र के अपनी भाषा में बौद्धिक विकास के आह्वान में बताईं। उन्होंने भौतिक विज्ञानी और शिक्षाविद प्रोफेसर डी.एस. कोठारी के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने एक समय सीएसटीटी की अध्यक्षता की थी।