सफलता डॉट कॉम द्वारा राइज ऑफ सस्टेनेबल मीडिया विषय पर आयोजित किये गए मास्टर क्लास सेशन में अतिथि मर्केल सोकरेटी (डेंट्सू एजिस नेटवर्क) के वाइस प्रेसीडेंट कुणाल कपूर ने कहा कि सस्टेनेबेलिटी (स्थिरता) शब्द सस्टेन से आया है। सस्टेन का अर्थ समझें तो किसी भी चीज, वस्तु, या पर्यावरण को मूल रूप में बनाये रखना ही सस्टेनेबिलिटी है। बीते वर्षों में सस्टेनेबिलिटी के ऊपर काफी चर्चा हो रही है। हमारे पास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन खत्म होने को हैं अब वो वक्त आ गया है जब हम प्रकृति द्वारा दिये गए संसाधनों का दोहन बंद करें। क्योंकि अब सस्टेनेबेलिटी के बारे में बात करना बहुत जरूरी हो गया है। छोटी छोटी चीजें होनी शुरू हो चुकी हैं। अतिवृष्टि, कोविड महामारी, ग्लेशियर का पिघलना, द अफ्रीका में पीने का पानी कई शहरों में अब नहीं बचा है। उन्होंने युवाओं को कहा कि हम सभी को सामाजिक जिम्मेदारी निभानी होंगी। हमारे प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सीखना होगा, ताकि लंबे समय तक हम इनका इस्तेमाल कर सकें हमारी आने वाली पीढ़ियों तक ये आसानी से पहुंचे।
एक स्टडी के अनुसार गूगल पर एक सर्च करने पर कार्बन फुट प्रिंट्स उत्पन्न होता है। देश दुनियां में लाखों करोड़ों सर्च हर समय हो रही हैं जिसे संभालने के लिए गूगल ने सर्वर्स लगा रहे हैं जो इलेट्रिसिटी से चलते हैं जिसमें ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है। वहां भी कार्बन बर्न हो रहा है। एक जनवरी 2020 में हुई इस क्लाइमेंट स्टडी में सामने आया कि सिर्फ डिजिटल एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री का जो कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन है वो एक साल का 84000 मीट्रिक टन है। ये सिर्फ एक देश यूके का है। एक अन्य स्टडी में सामने आया है कि डिजिटल एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री एक मिलियन टन कार्बन प्रति वर्ष उत्सर्जित कर रही है। एक बैनर एड से .76 ग्राम कार्बन डाइ ऑक्साइड वातावरण में जाती है। सिर्फ एक एड कैंपेन के एक महीने 70 मिलियन कॉर्बन डाइऑक्साइड वातावरण में जाती है। जोकि 200 घरों को बिजली मुहैया कराने के बराबर है। इसके अलावा एक और स्टडी में कहा गया है हर एक मिलियन एड इंप्रेशंस के लिए एक टन कार्बन डाइ ऑक्साइड वातावरण में भेजता है, और हर एक दिन गूगल 30 बिलियन एड इंप्रेशन जनरेट कर रहा है।
कपूर ने कहा बहुत सारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, एनजीओ, निजी क्षेत्र और सरकारी विभाग पर्यावरण के लिये काम कर रहे हैं। देश में पेट्रोल डीजल बिजली कोयला की खपत कम करने के लिए ई वाहन अभियान चल रहा है। लोग ग्रीन इनर्जी की ओर मूव कर रहे हैं, सोलर इनर्जी से आज देश में कई घर, विभाग, कंपनियां रौशन हो रही हैं। वहीं उन्होंने देश में प्लास्टिक से बनी चीजों पर निर्भरता कम करने के लिए आदिवासी क्षेत्र और जागरूक लोगों द्वारा बनाए जा रहे सामानों के इस्तेमाल पर बल दिया। उन्होंने युवाओं के लिए कहा कि आज से 20 साल पहले युवाओं के लिए जो चुनौतियां थी वो अब लगभग खत्म हो चुकी हैं। आज के समय में चुनौतियां अलग हैं डिमांड कम है लोग ज्यादा हैं, प्रतिस्पर्धा आज की सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन इसके साथ ही युवाओं के पास आज सोशल मीडिया है, टेक्नोलॉजी है। आज हर चीज का एप आ चुका है। आज की पीढ़ी के पास एक बड़ा एडवांटेज है वो सिर्फ एक बटन पर कोई भी सूचना हासिल कर सकते हैं। आजकल कॅरिअर बनाने के लिए विकल्पों की कमी नहीं है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बनकर भी आज आप लाखों रुपये महीना कमा सकते हैं बशर्ते आप के अंदर टैलेंट होना चाहिए।
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