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अक्षय ऊर्जा स्रोतों से दूर होगा भारत का विद्युत संकट -विनोद कड़कीकर

Tue, 22 Nov 2016 02:09 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मस्दर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एण्ड टैक्नोलॉजी अबु-धावी के एसोशिएट प्रोफेसर तथा दुबई के रहने वाले विनोद कड़कीकर ने भारत के विद्युत संकट पर चिंता व्यक्त की और कहा कि भारत में ऊर्जा की आपूर्ति नहीं है, जिसके कारण लोग रोजगारपरक नहीं बन पा रहे हैं। भारत देश में ऊर्जा आपूर्ति के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली प्राप्त करने का विकल्प है। जिससे भारत देश में विद्युत संकट खत्म हो जायेगा।
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दुबई के विनोद कड़कीकर जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के बीटेक इलैक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन में आयोजित तीन दिवसीय ‘‘आईईईई सीसीआईएस-2016‘‘ कार्यशाला में छात्रों और शिक्षकों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने बातचीत में बताया कि समूचे विश्व में भारत ही एक कृषि प्रधान देश है। जिससे वह विश्वभर में अपने आप में ताकतवर माना जाता है, लेकिन देखने को मिला है कि भारत में विद्युत संकट के चलते बडे़-बडे़ उद्योगों ने दम तोड़ दिया है। इस कारण छात्र-छात्राओं के सामने भी रोजगार की समस्या उत्पन्न होने लगी है।

उन्होंने अपने द्वारा रिसर्च किए जा रहे अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली प्राप्त करने का विकल्प है। अक्षय ऊर्जा नवीकरणीय होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी है। 
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उन्होंने दावा किया है कि भारत में अक्षय ऊर्जा के कई स्रोत उपलब्ध है। सुदृढ़ नीतियों द्वारा इन स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। वह जल्द ही इस प्रोजेक्ट को पूरा कर भारत देश में अक्षय ऊर्जा का उत्पादन करेंगे। छात्रों के एन्टरप्रोन्योर बनने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि अगर छात्र भावी एन्टप्रेन्योर बनना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें अपने सामूहिक विकास पर ध्यान देना होगा। जिससे वो वित्तीय रूप से और मानसिक रूप से उस कार्य के लिए दृढ़ हो सकते हैं। 

अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किये गए डिजिटल इंडिया अभियान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए इस डिजिटल इंडिया अभियान की उनके देश में सराहना चल रही है।  

सिंगापुर से आये नेशनल टेक्नीकल कंसल्टेंट नैनो रेल के विषेशज्ञ डॉ. एम. के राधाकृष्णनन से छात्रों की लक्ष्य प्राप्ति के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में ऐसी ही सेमिनार आयोजित होंगी तो वह छात्रों के लिए रिसर्च फील्ड में जाने के लिए लाभदायक होगी, क्योंकि इससे छात्रों में नए आइडियाज उत्पन्न होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि अगर हमारे जीवन का कोई बडा उद्देश्य है तो हमें एक पथ की जरूरत होती है और वह खुद को ही चुनना होगा और इसके लिए हमें चारों ओर के वातावरण से सीखना होगा। 

उन्होंने मच्छर का उदाहरण लिया और कहा कि ‘मच्छर‘ हमें सीधे तौर नहीं काटता है वह घूम-घूम कर आता है, यानि वह रास्ता ढूंढता है और वार करता है। इसी तरह में हमें भी प्रकृति से सीखते रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षा स्तर के बारे में भी बताया कि वैसे तो वर्तमान सरकारें नागरिकों के हित के शिक्षा स्तर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न निर्णय ले रही हैं, लेकिन यह निर्णय आगे की ओर रुख नहीं कर रहे हैं इसके लिए हमें खुद को ही आगे आने की जरूरत है। 

जीएलए विष्वविद्यालय के बीटेक इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. एम के राधाकृष्णनन, आईआईटी कानपुर के डॉ. जे राम कुमार, आईईईई के वाइस चेयरमैन डॉ. कुमार वैभव श्रीवास्तव, राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रधानाचार्य डॉ. मिथलेश कुमार, प्रतिकुलपति प्रो. ए.एम अग्रवाल, विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार देवलिया, डॉ. विशाल गोयल, डॉ अतुल बंसल, डॉ. दिलीप शर्मा, प्रो. अभय चतुर्वेदी, प्रो. आषीश शुक्ला आदि ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन फाकिया मोहिन ने किया। इस अवसर पर अमन दीप, आन्जनेय सिंह चौहान, शुभम सिंह, शुभम पाण्डेय, विवेक सारस्वत, रूचिर गुप्ता आदि का सहयोग सराहनीय रहा।  
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