भारत में कॉम्पेटेटिव एग्जाम्स को लेकर इतना कंफ्यूजन बढ़ गया है जिसकी तुलना करना भी अब मुश्किल हो रहा है। इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्रों के लिए एंट्रेंस एग्जाम देकर अच्छे कॉलेज में एडमिशन लेना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात बन गई है। अब तो शिक्षा का क्षेत्र भी कानून के पचेड़ों में घिरने लगा है जिसके चलते छात्रों के भविष्य पर इसका बहुत गहरा असर पड़ रहा है। पिछले कुछ समय से मेडिकल की प्रवेश परीक्षा NEET सुर्खियों में नजर आ रही है। आपको बता दें कि भारत जैसे विशाल देश में मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं की संख्या सिर्फ 90 थी, जिसे कम करके एक किया गया था।
संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम भारत सरकार व अन्य केस में पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया कि इस परीक्षा को NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंटरेंस टेस्ट) का नाम दिया जाएगा। चाहे सरकारी कॉलेज हों या प्राइवेट ज्यादातर संस्थान इसके लिए तैयार हो गए। आपको बता दें कि नीट की परीक्षा के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और डेंटल काउंसिल आफ इंडिया ने 21 दिसंबर 2010 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था।
600 मेडिकल कॉलेज प्रभावित होते
NEET परीक्षा
सबसे पहले NEET की परीक्षा का आयोजन दो चरणों में होने वाला था, फैज1 और फेज 2। लिखित परीक्षा के आधार पर सीबीएसई अखिल भारतीय रैंक बनाती और नामांकन करने वाली अथॉरिटी को भेज देती। उसी के आधार पर काउंसलिंग की प्रक्रिया होती। वहीं शुरुआत में प्राइवेट कॉलेजों ने नीट के तहत टेस्ट कराए जाने का पूर्ण रूप से विरोध किया था। कॉलेजों का मानना था कि संविधान पीठ के इस फैसले से देश भर के करीब 600 मेडिकल कॉलेज प्रभावित होंगे। लेकिन वहीं सीबीएसई के अनुसार ये एक उचित व्यवस्था थी जिससे प्राइवेट कालेजों की मनमानी पर रोक लग सकती थी।
आपको बता दें कि साल 2013 में दिल्ली में छात्रों ने नीट के समर्थन में रैली भी की थी। छात्रों का मानना था कि प्राइवेट कॉलेजों की मनमानी से बचाने के लिए यही एक बेहद बढ़िया रास्ता है।
एआईपीएमटी में 720 नंबर की परीक्षा होती थी
NEET परीक्षा
एआईपीएमटी और दूसरी परीक्षाओं के पैटर्न और तैयारी की रणनीति में भी बहुत अंतर होता है। जैसे कुछ जगहों पर मेडिकल परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग नहीं होती। 100 नंबर का भौतिकी और रसायन शास्त्र और 100 नंबर का जीव और जंतु विज्ञान। एआईपीएमटी में 720 नंबर की परीक्षा होती थी और उसमें नेगेटिव मार्किंग भी होती थी।
सिर्फ इतना ही नहीं बिहार में 30% नंबर एनसीईआरटी से होता था बाकी राज्य के सिलेबस से जबकि एआईपीएमटी में 80% एनसीईआरटी से होता था।
25 वर्ष से ऊपर के उम्मीदवार दे सकते हैं परीक्षा
NEET परीक्षा
कुछ समय पहले ही यूजीसी ने ये घोषणा की थी कि नीट एग्जाम में अब 25 वर्ष से ऊपर आयु के अभ्यर्थियों को शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। सिर्फ इतना ही नहीं उन कैंडीडेट्स को भी मौका नहीं मिलेगा जो कि तीन बार नीट एग्जाम में बैठ चुके हैं। पहले आठ भाषाओं को लेकर नोटिफिकेशन में देरी हुई। फिर नीट की अर्हता से जुड़े मामले लंबित थे। यूजीसी, सीबीएसई, एमसीआई और एचआरडी मंत्रालय की संयुक्त बैठक में तय कर दिया गया कि अब नीट परीक्षा में शामिल होने के लिए कम से कम आयु 17 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष होगी।
अभी तक इस परीक्षा के लिए कोई अधिकतम आयु की सीमा नहीं थी। यानि कुल मिलाकर नीट में बड़े कंफ्यूजन के दोर से गुजर रहा था और अब सुप्रीम कोर्ट ने NEET परीक्षा के लिए 25 वर्ष से ऊपर के उम्मीदवारों को अनुमति दे दी है। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय ने फॉर्म भरने की तिथि भी 5 अप्रैल तक बढ़ा दी है।