एक सवाल से जन्मी कंपनी
आईआईटी में पढ़ाई के दौरान अवैस ने महसूस किया कि पर्यावरण और जलवायु शोध के लिए आवश्यक सैटेलाइट डाटा आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसी समस्या का समाधान करने के उद्देश्य से उन्होंने 2019 में अपने साथी क्षितिज खंडेलवाल के साथ बंगलूरू में पिक्सेल की स्थापना की। सीमित संसाधनों और शुरुआती पूंजी के साथ शुरू हुई इस कंपनी का लक्ष्य अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट विकसित करना था, जो पृथ्वी की अधिक सटीक और विस्तृत तस्वीरें व आंकड़े उपलब्ध करा सके। उनकी मेहनत का परिणाम 2020 में मिला, जब पिक्सेल ने अपना पहला उपग्रह पिक्सेल-1 सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा।
नासा का साथ और गूगल का भरोसा
दो अप्रैल, 2022 को अमेरिका के केप कैनावेरल से पिक्सेल का हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट 'शकुंतला' लॉन्च हुआ, जो भारत का पहला निजी व्यावसायिक इमेजिंग सैटेलाइट बना। इस उपलब्धि से भारतीय स्पेस टेक स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खुले। लॉन्च से पहले कंपनी आर्थिक संकट से जूझ रही थी, लेकिन 2022 की शुरुआत में 2.7 करोड़ डॉलर की सीरीज-ए फंडिंग मिलने से उसे नई रफ्तार मिली। आज पिक्सेल 900 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है, गूगल जैसे बड़े निवेशकों का भरोसा जीत चुकी है और नासा जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ काम कर रही है। कंपनी के फायरफ्लाई उपग्रह भी सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में कार्यरत हैं।
युवाओं को सीख
- समस्याओं में अवसर तलाशने की सोच विकसित करें।
- सीमित संसाधन सफलता की राह में बाधा नहीं बनते।
- किताबें और सीखने की आदत जीवन बदल सकती है।
- मेहनत से असंभव लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।