प्रति वर्ष चार करोड़ रुपये तक मिलेंगे
इस योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 4 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। पहले दी संस्करण की सफलता को देखते हुए अब 200 संस्थानों को सम्मेलन के लिए दो-दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की योजना तैयार की गई है। प्रत्येक चयनित संस्थान को यह सहायता दी जाएगी। ये कार्यक्रम दो से तीन दिनों की अवधि के होंगे और हिंदी, तमिल, तेलुगु, बांग्ला, मराठी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, उर्दू सहित 22 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित किए जाएंगे।