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परफ्यूम इंडस्ट्री में रोजगार की अपार संभावनाएं, मोटी कमाई

Mon, 07 May 2018 12:22 PM IST
शान मोहम्मद, अमर उजाला
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फाइल फोटो
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अगर आपको भी सुगंधों की अच्छी समझ है, तो आपके लिए परफ्यूम इंडस्ट्री में परफ्यूमर या फ्रेग्रेंस केमिस्ट के तौर पर रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
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ऐसी मान्यता है कि परफ्यूम्स के इस्तेमाल की शुरुआत मेसोपोटामियन सभ्यता के लोगों ने की थी। हजारों साल बाद भी परफ्यूम्स का उत्साह कम नहीं हुआ है, बल्कि अब यह एक भरे-पूरे उद्योग में बदल चुका है। इस क्षेत्र में युवाओं के लिए करियर के नए दरवाजे खुले हैं। 

यदि आपको भी नई-नई सुगंध लुभाती हैं, तो आप बन सकते हैं एक सफल परफ्यूमर या फ्रेग्रेंस केमिस्ट। दरअसल, अब तक लोग परफ्यूम और फ्रेग्रेंसेज का बिजनेस अपने शौक या पुश्तैनी काम को आगे ले जाने के लिए करते थे, लेकिन बाजार में बढ़ते ब्रैंड्स व प्रतिस्पर्धा ने इस उद्योग के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। अगर आपको भी फ्रेग्रेंसेज की अच्छी समझ है, तो आप एक परफ्यूमर या फ्रेग्रेंस केमिस्ट के तौर पर करियर बना सकते हैं।
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कौन होते हैं परफ्यूमर्स?
परफ्यूम के कॉम्पोजिशन और उसकी फ्लेवरिंग को तैयार करने वाले जानकारों को परफ्यूमर कहा जाता है। फ्रेग्रेंस प्रोडक्शन में इनकी भूमिका बेहद अहम होती है। ये परफ्यूम में इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थों के गुणों और प्रभाव को समझकर नए एरोमा फॉर्मूला तैयार करते हैं।

ये न सिर्फ परफ्यूम्स के लिए बल्कि हर तरह के प्रोडक्ट जैसे एयर फ्रेशनर्स, रूम फ्रेशनर्स, एंटीपरस्पिरेंट्स, लॉन्ड्री व क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स आदि के लिए भी एरोमा फॉर्मूला तैयार करते हैं। इन्हें फ्रेग्रेंस केमिस्ट भी कहा जाता है।

आवश्यक कोर्सेज
इस उद्योग में करियर बनाने के लिए इंटरमीडिएट में रसायन विज्ञान विषय होना जरूरी है। इसके बाद आगे रसायन विज्ञान से बीएससी या एमएससी करें। इसके अलावा आप परफ्यूमरी एंड फ्लेवर्स टेक्नोलॉजी में मास्टर्स, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोग्राम इन एरोमा मैनेजमेंट, एरोमा टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन, परफ्यूमरी एंड कॉस्मेटिक मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी कर सकते हैं।

परफ्यूमर्स का काम
परफ्यूमर्स मूल रूप से प्रोडक्ट की फ्रेग्रेंस में इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थों की केमिकल टेस्टिंग करते हैं, ताकि उनकी गुणात्मक व मात्रात्मक व्याख्या की जा सके। इसके अलावा ये इस बात को भी सुनिश्चित करते हैं कि उत्पादन प्रक्रिया में पर्यावरण और गुणवत्ता संबंधी मानकों व नियमों का पालन हो।

इनकी जॉब ड्यूटी में तैयार मटेरियल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, डेडलाइन्स को ध्यान में रखते हुए उत्पाद की प्राथमिकता तय करना, जरूरत के हिसाब से एरोमा फॉर्मूला में बदलाव करना और गुण विशेष, जैसे बॉडी, हार्मोनी, स्ट्रेंथ, परमानेंस आदि के मुताबिक फ्रेग्रेंस का मूल्यांकन करना शामिल है।

व्यक्तिगत विशेषताएं
एक बेहतरीन परफ्यूमर बनने के लिए सेंस ऑफ स्मेल होना सबसे जरूरी है। इसके अलावा आपमें अलग-अलग खुशबुओं को आकर्षक तरीके से मिलाने की प्रतिभा, अच्छी याददाश्त, धैर्य, बढ़िया लैबोरेट्री स्किल्स, अच्छा टाइम मैनेजमेंट, टीम वर्किंग स्किल्स व बेहतरीन रिटन व ओरल कम्युनिकेशन स्किल्स होनी चाहिए।
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भविष्य में संभावनाएं
आप बड़े-बड़े परफ्यूम हाउसेज या कंपनीज के क्रिएटिव, एप्लिकेशन और इवैल्यूएशन डिपार्टमेंट में काम कर सकते हैं। इसके अलावा आप फूड एंड बेवरेज, टी एंड वाइन और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में भी काम कर सकते हैं। शुरुआत में एप्लिकेशन डिपार्टमेंट में परफ्यूमर्स को 20 से 25 हजार रुपये की नौकरी आसानी से मिल जाती है, जबकि क्रिएटिव डिपार्टमेंट में परफ्यूमर को कुछ साल के अनुभव के बाद 60 से 80 हजार रुपये तक वेतन मिल जाता है।
 
20-25 हजार रुपये महीना वेतन शुरुआत में मिल जाता है
 
प्रमुख शिक्षण संस्थान
इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई
वी.जी. वझे कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स, मुंबई
फ्रेग्रेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर, कन्नौज
मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई
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