जब भी हमें किसी शब्द का अर्थ समझ नहीं आता, तो हम सबसे पहले शब्दकोश (डिक्शनरी) देखते हैं। जरा सोचिए, ये मोटी-मोटी डिक्शनरियां नहीं होतीं, तो कितना मुश्किल होता, किसी शब्द का सही अर्थ और उसकी सही वर्तनी को जान पाना। क्या आप जानते हैं कि शब्दकोश बनाता कौन है? क्या कहते हैं इस अद्भुत क्षेत्र और इसे बनाने वाले को?
दरअसल, शब्दकोश लिखने की कला को लेक्सिकोग्रैफी ‘कोश रचना’ कहते हैं। जो इस कला में माहिर होता है, वह ‘लेक्सिकोग्राफर’ कहलाता है। दूसरे शब्दों में कहें, तो लेक्सिकोग्रैफी, डिक्शनरी के प्रारूप में शब्दों को लिखने की एक कला है। लेक्सिकोग्रैफी या शब्द लेखन का भाषा अध्ययन के इतिहास, खासकर डिक्शनरी बनाने के सिद्धांत, इतिहास, कार्य-प्रणाली और टाइपोलॉजी में एक महत्वपूर्ण स्थान है।
लेक्सिकोग्राफर का कार्य
लेक्सिकोग्राफर या कोशकार एक पेशेवर भाषाविद होते हैं, जिनका मुख्य काम शब्दकोश का निर्माण करना है। साथ ही ये खास किताबें जैसे डिक्शनरी, एन्साइक्लोपीडिया, कई अन्य संदर्भ किताबें जैसे लॉ, मेडिकल डिक्शनरी या फिर स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए संक्षिप्त डिक्शनरी डिजाइन करते हैं।
ये मुख्य रूप से डिक्शनरी एन्ट्री के काम में शामिल होते हैं, जो उच्चारण, व्याकरण संबंधी टर्म्स की परिभाषाएं, कई भाषाओं, उपभाषाओं संबंधित परिवर्तन या भिन्नता और शब्द व्युत्पत्ति विज्ञान (एटिमोलॉजी) जैसे विषयों पर कार्य करते हैं। इन सभी कार्यों को करने के दौरान, उन्हें कई अन्य बातों जैसे शब्दों और उनके अर्थों को समझना, किस तरह से किसी भाषा के शब्द संग्रह को रचा जाता है, किस तरह से लोग शब्दों का इस्तेमाल कर, उसके अर्थ को समझते हैं, भाषा में शब्दों की संरचना आदि बातों पर भी विचार-विमर्श करते हैं।
शाखाओं पर नजर
यह दो शाखाओं में बंटा होता है। पहला, प्रैक्टिकल और दूसरा थियोरेटिकल लेक्सिकोग्रैफी। प्रैक्टिकल लेक्सिकोग्रैफी में संकलन (कम्पाइलिंग), लेखन और डिक्शनरी को संपादित करने का काम शामिल होता है। थियोरेटिकल लेक्सिकोग्रैफी मुख्य रूप से भाषाओं और शब्द-संग्रहों के अध्ययन से जुड़ा होता है। साथ ही डिक्शनरी के संकलन के लिए बेहतर तरीकों को विकसित करने का काम भी इसके अंतर्गत आता है। डिक्शनरी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों के अर्थ और रचना-संबंधी थियोरीज विकसित करना भी इसका मुख्य काम होता है।
कार्य संभावनाएं
एक लेक्सिकोग्राफर डिक्शनरी को प्रिंट, ऑनलाइन या फिर दोनों ही रूप में पब्लिश करता है। आमतौर पर ये पब्लिशिंग हाउसेज के साथ काम करते हैं। करियर की शुरुआत असिस्टेंट एडिटर या जूनियर एडिटोरियल असिस्टेंट के तौर पर की जा सकती है। पब्लिशिंग में अनुभव प्राप्त करने के बाद एडिटर या लेक्सिकोग्राफर के रूप में तरक्की पा सकते हैं। कुछ पब्लिशिंग हाउसेज फ्रेशर्स को बतौर ट्रेनिंग जॉब देते हैं, ई-बुक्स और ऑनलाइन डिक्शनरी बनाने के क्षेत्र में।
शैक्षणिक योग्यता एवं कोर्स
यदि आपको लेक्सिकोग्राफर बनना है, तो हिंदी, इंग्लिश या अन्य संबंधित भाषाओं में मास्टर्स या डॉक्टोरल डिग्री की जरूरत पड़ेगी। इस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए लेक्सिकोग्रैफी या फिर भाषा विज्ञान में एडवांस डिग्री, डिप्लोमा या डॉक्टोरेट कोर्सेज करने की आवश्यकता होती है।
भाषा विज्ञान, लैंग्वेज ट्रांसलेशन या अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में एडवांस डिग्री प्राप्त करने से शब्दों से जुड़ी जानकारियां, ज्ञान और उसका इस्तेमाल करने में आसानी होती है। आज देश भर में कई यूनिवर्सिटीज विभिन्न भाषाओं जैसे हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत, पंजाबी, तमिल आदि में लेक्सिकोग्रैफी का कोर्स करवाने लगे हैं। मास्टर्स डिग्री कोर्स करने के लिए आपका संबंधित भाषा में स्नातक होना जरूरी है। कुछ संस्थान मास्टर्स डिग्री कोर्स में दाखिले देने से पहले प्रवेश परीक्षा संचालित करवाते हैं।
वेतन
इस क्षेत्र में 15 से 20 हजार रुपये शुरुआत में एक लेक्सिकोग्राफर पब्लिकेशन हाउस में काम कर कमा सकता है।
प्रमुख शिक्षण संस्थान
डेक्कन कॉलेज, पुणे
www.dcpune.ac.in
डिपार्टमेंट ऑफ लिंग्विस्टिक एंड पंजाबी लेक्सिकोग्रैफी, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला
www.punjabiuniversity.ac.in
स्कूल ऑफ तमिल एंड द्रविड़ियन लैंग्वेजेज, यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास,
www.unom.ac.in
डिपार्टमेंट ऑफ लिंग्विस्टिक, भारतियर यूनिवर्सिटीज, कोयम्बटूर, तमिलनाडु
www.b-u.ac.in
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ केरल
एक्सपर्ट क्या कहते हैं
अरविंद कुमार, कोशकार, दिल्ली के अनुसार, यदि कोई विद्यार्थी लेक्सिकोग्राफर यानी कोशकार बनना चाहता है, तो उसे हर विषयों और भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है। आजकल तो गूगल और वीकीपीडिया पर सब कुछ उपलब्ध है। पहले ऐसा नहीं था। किसी भी शब्द का अर्थ जानना, बहुत मुश्किल होता था।
शब्दकोश कम होते थे, पर अब ऐसा नहीं है। आज जहां भी लेक्सिकोग्रैफी से संबंधित कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, उसमें दाखिला जरूर लें। इससे संबंधित विभागों में पढ़ाई करने के बाद राह आसान हो सकती है। जिस भी विषय में रुचि हो, उससे संबंधित शब्दों को नेट या फिर अन्य शब्दकोशों में देखें।
इस क्षेत्र में कुछ वर्षों तक काम करने के बाद आप शिक्षक भी बन सकते हैं। शब्दों के अर्थ, उसकी वर्तनी में गलती होने पर अर्थ का अनर्थ हो सकता है। इंग्लिश पर मजबूत पकड़, भाषाओं को जानने-समझने के प्रति जिज्ञासा, विश्लेषणात्मक गुण, लिखित संचार कौशल, व्याकरण संबंधी ज्ञान आदि होना भी अनिवार्य है।