घोषणापत्र पर ये बोले उम्मीदवार
घोषणापत्र जारी करने के दौरान डुसू अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास ने कहा कि सुरक्षित आवास, महिला सुरक्षा, विद्यार्थियों की भागीदारी, बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दे हमारी प्राथमिकता हैं।
उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार ईशू मौर्य ने कहा कि दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम परिसर, समान अवसर और शैक्षणिक व सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उनकी बेहतर भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे। जबकि सचिव पद की उम्मीदवार रिया छाबड़ी ने कहा कि हर छात्रा को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना जरूरी है।
संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी लक्ष्य राज सिंह ने कहा कि समयबद्ध परीक्षा परिणाम के साथ रोजगार, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, डिजिटल कौशल और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने पर हमारा जोर रहेगा।
सभी सीट जीतने का भरा दम
रोजगार के लिए रोजगार मेले, उद्योगों व शोध संस्थानों से संपर्क, प्रशिक्षण-इंटर्नशिप, एआई व डिजिटल कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है। एबीवीपी ने डुसू की सभी चार सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर यश डबास, उपाध्यक्ष पर ईशू मौर्य, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह को प्रत्याशी बनाया है।
आइसा-एसएफआई ने छात्र सुरक्षा को बनाया मुद्दा
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डुसू) चुनाव को लेकर आइसा-एसएफआई गठबंधन ने सत्य निकेतन हादसे और जंतर-मंतर पर आंदोलन के मौजूदा परिदृश्य से जोड़ते हुए छात्र सुरक्षा, जवाबदेही, समानता और अधिकारों की लड़ाई को प्रमुख आधार बताया। गठबंधन ने डुसू में मौजूदा राजनीति को बदलने का भी दावा किया।
छात्र आंदोलन का भी जिक्र
आइसा डीयू सचिव अंजलि ने कहा कि इस बार का चुनाव जंतर-मंतर पर आंदोलन और सत्य निकेतन हादसे की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इन छात्र आंदोलनों में प्रगतिशील संगठनों ने अग्रिम भूमिका निभाई है।
इसका लाभ चुनाव में गठबंधन को मिलेगा। गठबंधन की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार अनन्या ने सत्य निकेतन हादसे को प्रमुख मुद्दा बनाया है। उत्तराखंड की रहने वाली अनन्या ने कहा कि वह सत्य निकेतन के आसपास रह चुकी हैं। वहां छात्रों के रहने की परिस्थितियों से परिचित हैं। हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग को आगे बढ़ाने की बात कही।
उपाध्यक्ष पद की उम्मीदवार अक्षत ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को छात्र आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि वह प्रयागराज से हैं। उनका परिवार पटना, दिल्ली और प्रयागराज के बीच रहा है। उन्होंने री-नीट 2026 से प्रभावित होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी अनुभव ने उन्हें जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
सचिव पद की स्टॉजिन ने कहा कि वह लद्दाख के एक गांव से आती हैं। रामजस छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने कॉलेज में यौन उत्पीड़न के खिलाफ हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका प्रयास कैंपस में अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रखने के साथ परिसर को सभी विद्यार्थियों के लिए अधिक समावेशी और सुगम बनाने का रहेगा।
सत्य निकेतन हादसे पर चिंता जताई
संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार बी पारिजात ने खुद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान परिवार से बताया। उन्होंने सत्य निकेतन हादसे पर चिंता जताते हुए कहा कि छात्रों को लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने डुसू में धनबल और बाहुबल की राजनीति को बदलने के लिए विद्यार्थियों से आगे आने की अपील की।
एसएफआई दिल्ली की अध्यक्ष नादिया ने कहा कि चुनाव में छात्र राजनीति के विमर्श और प्रगतिशील संगठनों के प्रति विद्यार्थियों के भरोसे में बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने डीयू के विद्यार्थियों से आइसा-एसएफआई गठबंधन के पैनल को समर्थन देने की अपील की।