सीसीएसयू से संबद्ध संस्थानों में आंतरिक परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा कुछ नए निर्णय लिए गए हैं। अब संस्थानों में होने वाली आंतरिक परीक्षा की कॉपियां संभालकर रखी जाएंगी, ताकि कोई विवाद होने की स्थिति में कॉपियों को फिर से देखा जा सके।
गौरतलब है कि सीसीएसयू से संबद्ध संस्थानों में दो तरह से परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है, जहां आंतरिक परीक्षा पूरी तरह संस्थान द्वारा निर्देशित होती है और मुख्य परीक्षा की तारीख से लेकर नियम विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
कई बार कुछ छात्र जो मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, आंतरिक परीक्षा में कम अंक प्राप्त कर पाते हैं। साथ ही कई बार आंतरिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कुछ छात्र मुख्य परीक्षा में कम अंक प्राप्त कर पाते हैं। ऐसे में कई बार संस्थानों पर पक्षपात का आरोप भी लगता है।
सीसीएसयू के प्रवक्ता डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध समस्त महाविद्यालयों/संस्थानों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्देशित किया गया है कि वह समय-समय पर होने वाली आंतरिक परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को तीन साल तक सुरक्षित रखें।
इसके बाद यदि कोई मामला जांच स्तर पर नहीं है, तो इन उत्तर पुस्तिकाओं को नष्ट किया जा सकता है। विश्वविद्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कुलपति एनके तनेजा द्वारा इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
इसके साथ ही कुछ अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए हैं, जैसे एमएड (सत्र 2011-12) की द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा का परिणाम पूर्व की परीक्षा समिति के निर्णय के अनुसार घोषित करने का निर्णय लिया गया है।
वहीं, एमफिल शारीरिक परीक्षा सत्र 2013-14 एवं 2014-15 के प्रवेश का परीक्षण कर परीक्षा कराने के लिए एक समिति का गठन किया गया था, समिति की आख्या के अनुसार विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया से प्रवेशित छात्रों की ही परीक्षा कराए जाने का निर्णय लिया गया है।