अगर आप केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं-12वीं कक्षा की परीक्षा में बैठ रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए छात्रों और अभिभावकों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श सुविधा शुरू की है।
तीन दिन में ही 50 से अधिक छात्रों की परामर्श लेने के लिए कॉल्स आई हैं। वहीं, अभी कुछ मनोवैज्ञानिकों से कॉल्स के आंकड़े एकत्रित किए जा रहे हैं। सबसे अधिक कॉल्स 12वीं कक्षा के छात्रों की हैं। इसमें मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के साथ कई राज्यों के छात्र शामिल हैं।
अधिकतर छात्र परीक्षाओं के डर से नींद न आने की शिकायत कर रहे हैं। वहीं, छात्रों में इंटरनेट की लत के लक्षण भी सामने आ रहे हैं। सीबीएसई की परीक्षाएं करीब हैं। कई छात्र परीक्षाओं को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में हेल्पलाइन पर परीक्षाओं की तनावमुक्त तैयारी, समय और तनाव प्रबंधन व पूछे जाने वाले प्रश्नों के बारे में बताया जा रहा है।
बोर्ड परीक्षाओं की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, वैसे ही परामर्श लेने वाले छात्रों की कॉल्स की संख्या बढ़ रही है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सकारात्मक तनाव जरूरी है, क्योंकि बिना तनाव से अपने लक्ष्य के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। साथ ही प्रयास में भी कमी छोड़ देते हैं, लेकिन नकारात्मक तनाव के कारण संबंधित विषय पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। ऐसे में हड़बड़ी में जो पढ़ा होता है, उसे भी भूल जाते हैं। वहीं, उनका कहना है कि छात्रों को अधिक बोझ दिमाग पर नहीं डालना चाहिए।
सफलता या असफलता से भयभीत नहीं होना है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि छात्रों को परीक्षाओं के दौरान इंटरनेट से दूरी बनानी जरूरी है। यह पढ़ाई में बाधा बन सकती है। उन्होंने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि शांत रहें, तनाव को दूर करने के लिए योग का सहारा लें और नींद पूरी लें।
ऐसे लें छात्र परामर्श
सीबीएसई के मुताबिक, बोर्ड के टोल फ्री नंबर 1800-11-8004 पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए मुफ्त आईवीआरएस सुविधा 24 घंटे उपलब्ध होगी। इसके माध्यम से तनाव के बारे में जानकारी और सुझाव दिए जाएंगे।
अभिभावक का डर भी बन रहा तनाव की वजह
सीबीएसई की हेल्पलाइन में कई छात्र स्कोर कम आने पर अभिभावकों की डांट की भी शिकायत कर रहे हैं। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा की शिकायत देखने को मिल रही है। कई अभिभावक छात्रों पर अच्छे स्कोर का दबाव डाल रहे हैं। वहीं, वह कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में पारिवारिक समस्या का असर पढ़ाई पर पड़ रहा है, जोकि छात्रों में तनाव की वजह बन सकता है। छात्रों को परामर्श देने वाली मनोवैज्ञानिक ने बताया कि परीक्षा को लेकर छात्रों पर दबाव नहीं डालना चाहिए।
अभिभावकों व सहपाठियों को पढ़ाई में सहायता करनी है। यही नहीं अगर कोई छात्र पहले असफल हुआ है, तो उसे असफलता का ताना नहीं देना है। वहीं, मनोवैज्ञानिकों की विशेष राय है कि छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाना है। मनोवैज्ञानिक प्रिया दुबे बताती हैं कि परीक्षा के दिन हल्का नाश्ता करें। एक दिन पहले ही हॉल टिकट व जरूरी चीजें रख लें। वहीं, जो उत्तर अच्छे से आता है, उसे पहले लिखें।
छात्र खुद पर विश्वास रखें और समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं। यह सभी चीजें छात्रों को तनाव से मुक्त रहने में मदद करेंगी।