उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में पहचाने जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती आज यानी 31 अक्टूबर को पूरा देश मना रहा है। आजादी से पहले हमारा देश छोटे-छोटे 562 देशी रियासतों में बंटा था। वे सरदार पटेल ही थे जो इन छोटे रियासतों का विलय करवा भारत को एकता के सुत्र में पिरोया था।
बता दें, 31 अक्टूबर 1875 को सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म गुजरात के नडियाद (ननिहाल) में हुआ। उनका पैतृक निवास स्थान गुजरात के खेड़ा के आनंद तालुका में करमसद गांव था। वे अपने पिता झवेरभाई पटेल तथा माता लाडबा देवी की चौथी संतान थे। उनका विवाह 16 साल की उम्र में झावेरबा पटेल से हुआ।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिस उम्र में आज के युवा नौकरी और अपनी उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ रहे होते हैं, उस उम्र में सरदार पटेल ने दसवीं की परीक्षा पास की थी। सरदार पटेल ने 22 साल की उम्र में हाईस्कूल पास किया था।
सरदार पटेल 5 जनवरी 1917 को पहली बार अहमदाबाद नगर निगम के दरियापुर सीट से पार्षद ( जिस चुनाव को उन्होंने एक वोट से जीता) और 1924 में वो अहमदाबाद नगर निगम के मेयर चुने गए थे।
देश मे तीसरी लैब साहीबॉग में बनाई गई। ये भी पटेेल के कारण ही मुमकिन हुआ। आजादी से पहले भारत में जन स्वास्थ्य से संबंधित केवल दो ही लैब कराची और पुणे में थे। सरदार पटेल को यह महसूस हुआ कि इसी तरह के कुछ और लैब्स होने चाहिए जो बीमारियों का पता लगा सके और पानी के गुणों की जांच कर सके।
सरदार पटेल ने सबसे पहले गुजराती भाषा में टाइपिंग करने के लिए टाईपराइटर की व्यवस्था कराई और फिर अहमदाबाद नगर निगम ने रेमिंगटन कंपनी को 4000 रुपए दिए ताकि गुजराती भाषा में टाईपराइटर बनाया जा सका।
उन्होंने उस समय के प्रसिद्ध वकील जिन्ना की मदद ली, जब अहमदाबाद नगर निगम के 18 सभासदों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। 28 अप्रैल 1922 को फंड्स के दुरुपयोग का मामला अहमदाबाद जिला कोर्ट में दर्ज की गई तो उन्होंने खुद का बचाव उम्दा तरीके से किया लेकिन 1923 में मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में चला गया वहां जिन्ना ने अपने वकीलों के साथ सरदार पटेल का केस लड़ा और फिर जीता।