शिक्षा में रटने के बजाय नए विचारों पर जोर क्यों?
केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और संपूर्ण विकास को बढ़ावा देना है। शिक्षा केवल परीक्षा पास करने और रोजगार पाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, "हमारा लक्ष्य सिर्फ किसी तरह डिग्री हासिल करना, परीक्षा पास करना और नौकरी पाना नहीं होना चाहिए। हमें समझना चाहिए, कल्पना करनी चाहिए और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए।"
मंत्री के अनुसार, विद्यार्थियों को विषयों की गहरी समझ विकसित करनी चाहिए। इससे वे समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और उनके नए समाधान खोज पाएंगे।
बच्चों की रुचि और क्षमता को पहचानना क्यों जरूरी है?
प्रह्लाद जोशी ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं को पहचानें। बच्चों पर किसी खास करियर को चुनने का दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम श्री स्कूल और अटल टिंकरिंग लैब जैसी पहल विद्यार्थियों में शोध, प्रयोग और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए बनाई गई हैं।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को रोजमर्रा की समस्याओं के तकनीकी समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनके विचारों को नमूने और व्यावहारिक परियोजनाओं में बदलने के अवसर भी मिलने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित रहने के बजाय अपने विचारों को वास्तविक जीवन में आजमाने का मौका मिलेगा।
क्या अंग्रेजी में दक्षता ही सफलता की पहचान है?
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय भाषाओं में शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल अंग्रेजी जानना किसी व्यक्ति की क्षमता या सफलता तय नहीं करता। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं में शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की पहल का उल्लेख किया। उनके अनुसार, स्कूली स्तर की पाठ्यपुस्तकें 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अलावा, दीक्षा ऐप पर 128 भारतीय भाषाओं और सात विदेशी भाषाओं में डिजिटल शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। मंत्री का कहना था कि विद्यार्थियों को अपनी भाषा में सीखने और अपनी क्षमता विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए। भाषा किसी की प्रतिभा के विकास में बाधा नहीं बननी चाहिए।
बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में किसका योगदान बताया?
प्रह्लाद जोशी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश विनिर्माण, चिकित्सा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इस दिशा में युवाओं की भूमिका अहम होगी। मंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में युवा पीढ़ी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान क्यों अहम है?
केंद्रीय मंत्री ने सरकार की विभिन्न योजनाओं और नवाचार से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट में नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
इसका जिक्र करते हुए उन्होंने नए विचारों, शोध और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस राशि के तहत अलग-अलग योजनाओं या धन के उपयोग का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुआ?
यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आयोजित सेवा पखवाड़ा के दौरान हुआ। इसमें प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया और विद्यार्थियों को विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।