बीकॉम यानी बैचलर ऑफ कॉमर्स करने के बाद छात्रों के सामने आगे की पढ़ाई और करियर के कई विकल्प होते हैं। आमतौर पर एमकॉम और एमबीए को आगे की पढ़ाई के लिए प्रमुख विकल्प माना जाता है। हालांकि, जो छात्र कम समय में किसी खास क्षेत्र की व्यावहारिक जानकारी हासिल करना चाहते हैं, वे डिप्लोमा कोर्स का विकल्प भी चुन सकते हैं। अकाउंटिंग, टैक्सेशन, बैंकिंग, फाइनेंस और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में ऐसे कई कोर्स उपलब्ध हैं। इनसे छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार एक विशेष स्किल विकसित करने में मदद मिल सकती है।
टैक्सेशन का डिप्लोमा क्यों चुनें?
इनकम टैक्स, जीएसटी और टैक्स से जुड़े नियमों में रुचि रखने वाले बीकॉम छात्रों के लिए टैक्सेशन से संबंधित डिप्लोमा उपयोगी हो सकता है। बीकॉम में पहले से कॉमर्स और अकाउंटिंग की बुनियादी जानकारी होने के कारण छात्रों के लिए टैक्स से जुड़े कई विषयों को समझना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इस तरह के कोर्स में टैक्स की गणना, जीएसटी और संबंधित नियमों की जानकारी दी जा सकती है। आगे चलकर छात्र अकाउंटिंग और टैक्सेशन से जुड़े काम के लिए अपनी स्किल विकसित कर सकते हैं।
फाइनेंशियल अकाउंटिंग
अकाउंटिंग में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए डिप्लोमा इन फाइनेंशियल अकाउंटिंग एक विकल्प हो सकता है। इसमें वित्तीय रिकॉर्ड तैयार करने, अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और वित्तीय विवरणों को समझने जैसी व्यावहारिक जानकारी दी जा सकती है। बीकॉम के दौरान पढ़ी गई अकाउंटिंग की जानकारी को आगे बढ़ाने के लिए यह कोर्स मददगार हो सकता है। इस क्षेत्र में अकाउंट असिस्टेंट और जूनियर अकाउंटेंट जैसे पदों से जुड़े करियर विकल्प तलाशे जा सकते हैं।
बैंकिंग एंड फाइनेंस कोर्स
जो विद्यार्थी बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, वे डिप्लोमा इन बैंकिंग एंड फाइनेंस पर विचार कर सकते हैं। इस कोर्स में बैंकिंग सिस्टम, लोन, वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़े विषयों की जानकारी दी जा सकती है। बीकॉम की पढ़ाई के साथ वित्तीय क्षेत्र की व्यावहारिक समझ विकसित करने से छात्रों को संबंधित नौकरियों के लिए अपनी तैयारी बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल मार्केटिंग
डिजिटल दौर में कंपनियों के लिए ऑनलाइन मार्केटिंग महत्वपूर्ण हो गई है। डिप्लोमा इन डिजिटल मार्केटिंग के जरिए छात्र एसईओ, सोशल मीडिया मार्केटिंग, कंटेंट मार्केटिंग और ऑनलाइन विज्ञापन जैसे विषयों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। कॉमर्स की समझ के साथ डिजिटल मार्केटिंग की स्किल छात्रों के लिए अलग तरह के रोजगार विकल्प तलाशने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, नौकरी के अवसर और वेतन उम्मीदवार की स्किल, अनुभव और कंपनी के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
कंप्यूटराइज्ड अकाउंटिंग
अकाउंटिंग का काम अब काफी हद तक कंप्यूटर और डिजिटल सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में डिप्लोमा इन कंप्यूटराइज्ड अकाउंटिंग छात्रों को अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर आधारित वित्तीय कार्यों की समझ विकसित करने में मदद कर सकता है। अकाउंटिंग के साथ तकनीकी जानकारी हासिल करने वाले विद्यार्थी अकाउंट असिस्टेंट, जूनियर अकाउंटेंट और संबंधित भूमिकाओं के लिए अपनी तैयारी कर सकते हैं।
क्या लाखों की सैलरी मिल सकती है?
बीकॉम के बाद कोई डिप्लोमा कोर्स करना करियर की दिशा में एक अतिरिक्त स्किल विकसित करने का विकल्प हो सकता है। हालांकि, केवल डिप्लोमा करने से हर उम्मीदवार को लाखों रुपये की सैलरी वाली नौकरी मिलने की गारंटी नहीं होती। वेतन नौकरी की भूमिका, उम्मीदवार की योग्यता, व्यावहारिक स्किल, अनुभव, कंपनी और स्थान जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए डिप्लोमा चुनते समय केवल सैलरी के बजाय कोर्स की गुणवत्ता, मान्यता, पाठ्यक्रम और अपने करियर लक्ष्य को भी ध्यान में रखना जरूरी है।