स्कूलों के लिए प्रमुख सिफारिशें
इनमें स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य करना, कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन, स्कूलों द्वारा सुरक्षित परिवहन की जिम्मेदारी लेना, बच्चों को "गुड टच" और "बैड टच" के बारे में पढ़ाना, साइबर अपराधों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और प्रमुख स्थानों पर '1098' (बच्चों की हेल्पलाइन) प्रदर्शित करना शामिल है।
बुधवार को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और नीला गोखले की खंडपीठ ने राज्य सरकार से रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों को देखने को कहा। कोर्ट ने कहा, "हम भी रिपोर्ट को देखेंगे। राज्य सरकार दो सप्ताह में बताए कि वह सिफारिशों पर क्या कदम उठाएगी।" पिछले साल अगस्त में, दो पांच वर्षीय लड़कियों के साथ उनके स्कूल परिसर के शौचालय के अंदर एक पुरुष परिचारक ने यौन उत्पीड़न किया था। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन सितंबर में पुलिस द्वारा कथित जवाबी गोलीबारी में उसे मार दिया गया था।
हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था
यौन उत्पीड़न की घटना के बाद, हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और निर्देश दिया था कि स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकार द्वारा विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि स्कूलों में सीसीटीवी लगाने के अलावा एक महीने की फुटेज भी सुरक्षित रखी जानी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी की आपराधिक पृष्ठभूमि पाई जाती है तो उसे तुरंत नौकरी से निकाल दिया जाना चाहिए। समिति द्वारा दिए गए सुझाव के अनुसार प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को “गुड टच, बैड टच” के बीच अंतर करना विशेष रूप से सिखाया जाना चाहिए।