आयुर्वेद को मिलेगी वैश्विक पहचान
आयुष मंत्री ने कहा कि सरकार आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के लिए सबूत-आधारित रिसर्च पर जोर दे रही है। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) और अन्य शोध संस्थानों की मदद से उच्चस्तरीय क्लिनिकल ट्रायल किए जा रहे हैं। वहीं, WHO के साथ साझेदारी में मानक तय किए जा रहे हैं ताकि आयुर्वेदिक उपचार की वैज्ञानिक विश्वसनीयता और बढ़े।
एलोपैथी और आयुष होंगे सहयोगी
जाधव ने यह भी स्पष्ट किया कि आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। उन्होंने कहा, “दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। नेशनल आयुष मिशन और आयुष ग्रिड के जरिए हम दोनों को मिलाकर एक एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल बना रहे हैं।”
स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगी मजबूती
सरकार की योजना के तहत, नेशनल आयुष मिशन (NAM) के जरिए देशभर में आयुष हेल्थ सेंटर और औषधीय उद्यान (Medicinal Gardens) स्थापित किए जा रहे हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में आयुष डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सब तक पहुंच सकें।
योग से लेकर WHO सेंटर तक
आयुष मंत्रालय ने पिछले दशक में आयुर्वेद और योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। इंटरनेशनल योगा डे, WHO Global Centre for Traditional Medicine और विभिन्न देशों के साथ हुए एमओयू (MOU) इसके बड़े उदाहरण हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता संतुलित विकास है। हर चिकित्सा पद्धति की विशिष्टता को बनाए रखते हुए आधुनिक शोध, मानकीकरण और शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।