2,500 रुपये में खरीदी गई एक बाल्टी
इन बाल्टियों की आपूर्ति 3 जुलाई को की गई थी और इसके लिए कुल 75,000 रुपये का बिल बनाया गया, यानी एक बाल्टी की कीमत 2,500 रुपये। जबकि बाजार में इन्हीं बाल्टियों की कुल कीमत लगभग 36,000 रुपये आंकी गई है, जो कि प्रति बाल्टी 1,200 रुपये के हिसाब से है।
सीबीआई की एफआईआर में आरोप है कि गौड़र और द्विवेदी ने पहले से तय योजना के तहत एक-दूसरे से सांठगांठ कर कॉलेज को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और खुद को लाभ पहुंचाया। रिश्वत के एवज में मनचाहा टेंडर पास कराया गया और भुगतान भी जारी करवाया गया।
जांच एजेंसी को जानकारी मिली कि गौड़र, द्विवेदी से 63,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे थे, जिसमें 39,000 रुपये बिल में की गई अधिक राशि थी और 24,000 रुपये पिछले लेन-देन के बदले मांगे गए थे। द्विवेदी ने इनमें से 55,000 रुपये देने पर सहमति जताई थी।
मामले की जांच जारी
इतना ही नहीं, सीबीआई को यह भी पता चला कि गौड़र के एक बैंक खाते में द्विवेदी द्वारा 1.95 लाख रुपये जमा कराए गए थे, ताकि अन्य सामग्रियों की खरीद में भी उन्हें प्राथमिकता मिल सके।
रिश्वत की इस संभावित लेन-देन की सूचना पर सीबीआई ने छापेमारी की और इस दौरान प्रोफेसर और वेंडर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की जांच जारी है।