मुट्ठी भर स्वार्थी, लालची और नासमझ व्यक्ति, जो शीर्ष पर थे, ने हमारी भावनाओं के साथ खेला और हजारों युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को निलंबित, गिरफ्तार, अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त और बर्खास्त अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की स्थिति और एक समेकित रिपोर्ट को कैबिनेट के समक्ष और सार्वजनिक डोमेन में रखने के लिए कहा गया है।
फेलिक्स ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक को सिस्टम को जड़ से साफ करने के अवसर के रूप में लिया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दोतरफा दृष्टिकोण अपनाया है: सभी शामिल लोगों को कानून के दायरे में लाने और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करने के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और न्यायपूर्ण जांच, और भविष्य में निष्पक्ष एपीपीएससी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करना हैं। उन्होंने कहा कि एपीपीएससी की सिफारिश के लिए एक समिति द्वारा एक मसौदा एसओपी तैयार किया गया है। चूंकि एपीपीएससी एक स्वायत्त निकाय है, इसलिए राज्य सरकार केवल एसओपी की सिफारिश कर सकती है।
हाल ही में एपीपीएससी द्वारा आयोजित सहायक अभियंता (सिविल) परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक का मामला तब सामने आया, जब उम्मीदवार ग्यामार पाडुंग ने 29 अगस्त को पुलिस शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि उन्हें परीक्षा के पेपर लीक होने का संदेह है। इस साल 26 और 27 अगस्त को हुई परीक्षा में 400 से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे। अक्तूबर में राज्य सरकार ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने आठ दिसंबर को ईटानगर के पास युपिया में जिला एवं सत्र न्यायालय में 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।