4.20 लाख विदेशी विद्यार्थी लेते हैं लाभ
रिपोर्ट के अनुसार शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में लगभग 4.20 लाख अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने ओपीटी कार्यक्रम का लाभ लिया। यह अमेरिका के कार्यबल में वैश्विक प्रतिभाओं के प्रवेश का एक प्रमुख माध्यम है। प्रस्ताव लागू होने पर इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी 44 प्रतिशत तक घट सकती है।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार, विश्वविद्यालयों पर सालाना 8.4 अरब से 16.5 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री माइकल क्लेमेंस के विश्लेषण के अनुसार, शुल्क लागू होने पर स्नातक डिग्री वाले विद्यार्थियों की भागीदारी लगभग आधी रह सकती है, जबकि मास्टर डिग्री वाले विद्यार्थियों की भागीदारी लगभग समाप्त हो सकती है। उनके मुताबिक, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में शोध करने वाले विदेशी पीएचडी विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
विश्वविद्यालयों और शोध क्षेत्र पर भी असर
अमेरिका में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या घटने से विश्वविद्यालयों को ट्यूशन फीस और अन्य मदों से होने वाली आय में भी नुकसान हो सकता है। क्लेमेंस के अनुमान के मुताबिक, अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सालाना 2.5 अरब से 4.2 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्री इना गंगुली का कहना है कि इसका असर केवल विद्यार्थियों की संख्या या विश्वविद्यालयों की आय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों की गुणवत्ता और चयन पर भी पड़ सकता है। बेहतर विकल्प रखने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थी दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं।
पहले भी बढ़ाई गई थीं वीजा संबंधी बाधाएं
ट्रंप प्रशासन ने 2025 में अत्यधिक कुशल विदेशी पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा पर भी 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा की थी। नेचर के अनुसार, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के आंकड़ों में इसके बाद नए आवेदनों में 90 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, उस व्यवस्था को लेकर कानूनी चुनौतियां भी सामने आईं।
इस बीच, अमेरिका में नए अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत कम रही। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बदलते आव्रजन नियम अमेरिका को विदेशी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए कम आकर्षक बना सकते हैं।
यदि नया प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका असर भारत सहित उन देशों के विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है, जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा लेकर वहां काम करने की योजना बनाते हैं। हालांकि, भारतीय विद्यार्थियों पर पड़ने वाले वास्तविक असर का अलग आकलन अभी उपलब्ध नहीं है।