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NCERT: 'एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों से संविधान की प्रस्तावना को हटाने का आरोप निराधार', धर्मेंद्र प्रधान ने कहा

Tue, 06 Aug 2024 04:07 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

NCERT: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि एनसीईआरटी द्वारा पाठ्यपुस्तकों से संविधान की प्रस्तावना हटाने का आरोप निराधार है। एनसीईआरटी ने दावा किया है कि वह एनईपी के दृष्टिकोण का पालन करते हुए बच्चों के समग्र विकास के लिए मौलिक कर्तव्यों, मौलिक अधिकारों और राष्ट्रगान से लेकर संवैधानिक मूल्यों को समान महत्व देता है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : PTI
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विस्तार
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NCERT: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को इस आरोप को निराधार करार दिया कि संविधान की प्रस्तावना को एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया गया है और आरोप लगाया कि कांग्रेस इस विषय का उपयोग अपनी "झूठ की राजनीति" को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है। जो विपक्षी दल की घृणित मानसिकता को दर्शाता है।

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यह आरोप लगाते हुए कि कांग्रेस को हमेशा भारत के विकास और शिक्षा प्रणाली से नफरत रही है, प्रधान ने कहा कि जो लोग बच्चों के भविष्य के साथ खेल रहे हैं और भारतीय शिक्षा प्रणाली को बकवास कहते हैं, उन्हें झूठ फैलाने से पहले सच्चाई जानने की कोशिश करनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री की यह टिप्पणी उन समाचार रिपोर्टों के बीच आई है जिनमें दावा किया गया है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कुछ पाठ्यपुस्तकों से संविधान की प्रस्तावना को हटा दिया गया है।
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एनसीईआरटी में पाठ्यक्रम अध्ययन और विकास विभाग की प्रमुख रंजना अरोड़ा ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि आरोप सच नहीं है।

"इस आरोप का कोई आधार नहीं है कि संविधान की प्रस्तावना को एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया गया है।" पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, एनसीईआरटी ने भारतीय संविधान के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तावना, मौलिक कर्तव्य, मौलिक अधिकार, राष्ट्रगान - पाठ्यपुस्तकों में उचित महत्व और सम्मान दिया है।

प्रधान ने एक पत्र में लिखा, "लेकिन शिक्षा जैसे विषय को झूठ की राजनीति के लिए इस्तेमाल करना और इसके लिए बच्चों की मदद लेना कांग्रेस पार्टी की घृणित मानसिकता को दर्शाता है। मैकाले की विचारधारा से प्रेरित होकर कांग्रेस को हमेशा भारत के विकास और शिक्षा प्रणाली से नफरत रही है।"  

उन्होंने दावा किया कि यह तर्क कि केवल प्रस्तावना ही संवैधानिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करती है, कांग्रेस की संविधान की समझ को उजागर करती है।

कांग्रेस के पापों का घड़ा भर चुका है और जो लोग इन दिनों 'फर्जी संविधान प्रेमी' बनकर घूम रहे हैं और संविधान की प्रतियां लहरा रहे हैं, उनके पूर्वजों ने बार-बार संविधान की मूल भावना की हत्या की थी।

प्रधान ने कहा, "अगर कांग्रेस पार्टी में थोड़ी भी शर्म और पछतावा बचा है, तो उसे पहले संविधान, संवैधानिक मूल्यों और एनईपी को समझना चाहिए और देश के बच्चों के नाम पर तुच्छ राजनीति करना बंद करना चाहिए।"

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