प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अजीत रानाडे ने गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) के कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया है। पुणे स्थित प्रतिष्ठित संस्थान के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
रानाडे को पहले 14 सितंबर को तत्कालीन चांसलर बिबेक देबरॉय ने पद से हटा दिया था, जब एक तथ्य-खोज समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि जीआईपीई के वीसी के रूप में उनकी नियुक्ति शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता पर यूजीसी नियमों के अनुरूप नहीं थी।
22 अक्तूबर को, जीआईपीई के नवनियुक्त चांसलर संजीव सान्याल ने रानाडे को कुलपति पद से हटाने का आदेश वापस ले लिया, जिससे उन्हें इस पद पर बने रहने की अनुमति मिल गई।
रानाडे ने 29 अक्तूबर को सान्याल को संबोधित अपने त्याग पत्र में कहा कि वह व्यक्तिगत कारणों से जीआईपीई के कुलपति का पद छोड़ रहे हैं।
रानाडे ने पत्र में कहा, "कृपया ध्यान दें कि यह इस्तीफा पत्र किसी भी तरह से अक्तूबर 2021 में कुलपति के रूप में मेरी नियुक्ति में किसी दोष या अयोग्यता को स्वीकार करने का संकेत नहीं देता है।"
उन्होंने संस्थान का नेतृत्व करने का अवसर देने के लिए जीआईपीई के प्रबंधन बोर्ड, सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी (एसआईएस-संस्थान की मूल संस्था) के ट्रस्टियों और कॉलेज स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।
संस्थान के अधिकारियों ने पुष्टि की कि रानाडे ने वीसी पद से इस्तीफा दे दिया है।
सितंबर में वीसी पद से हटाए जाने के बाद, रानाडे ने फैसले को चुनौती देने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और स्थगन आदेश हासिल करने में कामयाब रहे।
उच्च न्यायालय द्वारा रानाडे को हटाने के आदेश पर रोक लगाने के बाद, देबरॉय, जो उस समय प्रधान मंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष थे, ने 27 सितंबर को चांसलर पद से इस्तीफा दे दिया, यह कहते हुए कि उन्हें जीआईपीई में पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
देबरॉय (69) का एक नवंबर को दिल्ली में निधन हो गया। एसआईएस द्वारा 1930 में स्थापित जीआईपीई, देश में अर्थशास्त्र का सबसे पुराना अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान है।