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AISF: यूजीसी के नए नियमों पर विरोध, अखिल भारतीय छात्र फेडरेशन ने की मसौदा विनियम 2024-25 वापस लेने की मांग

Mon, 24 Feb 2025 08:47 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

AISF: अखिल भारतीय छात्र संघ ने यूजीसी विनियम 2024-25 के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला बताया। छात्र संगठन ने मसौदा नियमों को लोकतंत्र विरोधी करार देते हुए देशव्यापी विरोध की चेतावनी दी और यूजीसी को ज्ञापन सौंपा।
 
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एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग और महासचिव दिनेश सीरंगराज के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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UGC Draft: अखिल भारतीय छात्र संघ (AISF) ने सोमवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) भवन तक विरोध मार्च निकालते हुए यूजीसी विनियम 2024 और 2025 के मसौदे को तत्काल रद्द करने की मांग की। छात्र संगठन ने इन प्रस्तावित नियमों को संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला करार दिया।

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एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग और महासचिव दिनेश सीरंगराज के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ, जिसमें छात्रों ने नए नियमों को शिक्षा नीति के लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया। संगठन के आधिकारिक बयान में कहा गया कि जनवरी में जारी किए गए ये मसौदा नियम 2018 के मौजूदा दिशानिर्देशों को बदलकर संकाय नियुक्ति और शैक्षणिक योग्यता के मानकों में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं।

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केंद्र बनाम राज्यों का टकराव बढ़ा

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों को नियुक्तियों और पदोन्नति में अधिक लचीलापन देना है। हालांकि, यह कदम गैर-भाजपा शासित राज्यों में राजनीतिक विवाद का कारण बन रहा है। राज्यों का आरोप है कि यह प्रक्रिया विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करने और लोकतांत्रिक प्रशासन में बाधा डालने की कोशिश है।

राज्यों का मानना है कि यह नियम राज्य सरकारों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों को केंद्र के नियंत्रण में लाने का प्रयास है। सबसे अधिक विरोध राज्यपालों की बढ़ी हुई भूमिका को लेकर है, क्योंकि नए नियमों के तहत राज्यों के विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति में राज्यपाल की अधिक दखलंदाजी होगी।

एआईएसएफ ने किया विरोध प्रदर्शन, UGC को सौंपा ज्ञापन

एआईएसएफ ने आरोप लगाया कि नए नियम शिक्षकों, छात्रों और अकादमिक निकायों की भूमिका को कमजोर कर देंगे और विश्वविद्यालयों में प्रशासन को अधिक केंद्रीकृत बना देंगे।

अखिल भारतीय युवा महासंघ (AIYF) के सदस्यों ने भी इस विरोध में हिस्सा लिया। AISF और AIYF के प्रतिनिधियों ने UGC के संयुक्त सचिव एन. गोपुकुमार को ज्ञापन सौंपा और उनसे मसौदा नियमों को वापस लेने की मांग की।

एआईएसएफ का मानना है कि यूजीसी की एक सलाहकार निकाय के रूप में भूमिका को उसके अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे उसे विश्वविद्यालयों पर वित्तीय दंड लगाने और अनुदान रोकने का अधिकार मिल जाएगा, जिससे राज्य सरकारों के उच्च शिक्षा पर नियंत्रण कमजोर होगा।
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मसौदा वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज होगा: एआईएसएफ

एआईएसएफ ने यह भी कहा कि ये नए नियम लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इसमें शिक्षकों, छात्रों और अकादमिक परिषदों की भागीदारी को दरकिनार किया गया है। उन्होंने इस कदम को शिक्षा क्षेत्र में नौकरशाही नियंत्रण लागू करने का प्रयास बताया।

एआईएसएफ ने स्पष्ट रूप से इन नियमों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने नए मसौदे को वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

एआईएसएफ ने छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से अपील की है कि वे इस लड़ाई में शामिल हों और उच्च शिक्षा की स्वायत्तता को बचाने के लिए एकजुट हों। छात्र संगठन का मानना है कि नए नियम यदि लागू हुए तो राज्य सरकारों और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी और केंद्र सरकार का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा।
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