AICTE VAANI Scheme: एआईसीटीई ने भारतीय भाषाओं को तकनीकी शिक्षा में बढ़ावा देने के लिए वाणी योजना का दूसरा संस्करण लॉन्च किया। इस योजना के तहत 4 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से 200 सम्मेलन, सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
AICTE VAANI Scheme: भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने बुधवार को अपनी प्रमुख योजना एआईसीटीई वाणी (AICTE-VAANI) का दूसरा संस्करण लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं को तकनीकी शिक्षा में बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत, एआईसीटीई देशभर के कॉलेजों को 4 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, ताकि वे 200 सम्मेलन, सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित कर सकें। ये आयोजन 22 क्षेत्रीय भाषाओं में किए जाएंगे और इसमें उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी।
वाणी का उद्देश्य- क्षेत्रीय भाषाओं में मजबूत करना
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर टीजी सीताराम ने एक बयान में कहा कि वाणी (Vibrant Advocacy for Advancement and Nurturing of Indian Languages) योजना का उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं में एक मजबूत ज्ञान आधार स्थापित करना है, ताकि नई तकनीकी उन्नतियों का जानकारी लोकल भाषाओं में भी लोगों तक पहुंच सके। इस योजना के माध्यम से सभी शैक्षिक संस्थानों को भारतीय भाषाओं में शोध पत्र प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और यह शैक्षिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा।
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एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. अभय जरे ने कहा, "सभी भाषाओं में समस्या-समाधान और चिंतन क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। हमें भविष्य में शोध और संदर्भ के लिए सभी आयोजनों का एक संपूर्ण रिपोजिटरी तैयार करने पर भी विचार करना चाहिए।"
इस योजना में क्षेत्रीय भाषाओं की संख्या को 12 से बढ़ाकर 22 कर दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों की संख्या भी 12 से बढ़ाकर 16 कर दी गई है। इनमें क्वांटम तकनीक, हाइड्रोजन ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा विज्ञान, एग्रीटेक, खाद्य प्रसंस्करण, साइबर सुरक्षा जैसी उभरती तकनीक शामिल हैं।
कॉलेजों को मिली 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता
एआईसीटीई-वाणी 2025 के तहत, कॉलेजों को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह योजना 2025 में 200 सम्मेलन आयोजित करने के लिए 4 करोड़ रुपये का सालाना बजट प्रदान करेगी। ये आयोजनों को 22 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित किया जाएगा, जिसमें असमिया, बंगाली, हिंदी, कन्नड़, गुजराती, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू भाषाएं शामिल हैं।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 मार्च से 24 अप्रैल तक एआईसीटीई-अटल पोर्टल पर शुरू होगी। चयन प्रक्रिया में संस्थानों को एआईसीटीई के मानकों के आधार पर चुना जाएगा, ताकि सम्मेलन, सेमिनार या कार्यशाला की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
कोलकाता के टेक्नो इंटरनेशनल न्यू टाउन (TINT) कॉलेज की सहायक प्रोफेसर निलांजना दत्ता रॉय ने कहा, “एआईसीटीई-वाणी के माध्यम सेएआईसीटीई क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है। इस वर्ष जनवरी में हमने बंगाली भाषा में सुपरकंप्युटिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग को जोड़ने पर एक 2-दिन की कार्यशाला आयोजित की थी, जिसमें AICTE से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।”